
छाती मे गांठ का बनना
Tumor in Breast
दुध पिलाने वाली किसी-किसी महीला को आंतरीक परशानी होने के कारण छाती में गांठ बनने की समस्या आती है। यह गांठ कई तरह के होते है। इसका आकार छोटा या बड़ा हो सकता है। शुरुआत मे ये गांठ बहुत ही छोटा होता है जिसको आसानी से समझा नही जाता है और थोड़-थोड़ा दर्द करता है जो आसाानी से ठीक भी हो जाता है लेकिन समय के साथ इसमे बृद्धी देखी जाती है। इसके बाद इसमे कभी-कभी दर्द भी हो जाता है और समय के साथ कई तरह की परेशानी देखने को मिलती है। इस तरह की समस्या को नजर अंदाज नही करना चाहिए और इसके ईलाज के लिए जरुरी उपाय करने की जरुरत है।
गांठ का कड़ा होना या मुलायम रहने से भी इसका इलाज प्रभावित होता है। यदी यह दवाव देने पर मुलायम महसुस होता है तो इसका इलाज आसानी से हो जाता है। इसको Benign tumor भी कहा जाता है। यह कभी एक छाती मे कभी दोनो छाती मे या पहले एक या फिर और दोनो मे हो जाता है। समय से इसका ईलाज होने पर यह पुरी तरह से ठीक हो जाता है। कई महीलाओं को इस तरह के शिकायत को ठीक किया जा चुका है। गांठ के कड़ा होने पर भी इलाज होता है पर इसको बारीकी से परिक्षण की जुरुरत होती है। पर शरुआत मे इलका भी इलाज संभव है। कभी कभी चोट या फिर धाव की तरह दुखने के कारण भी ये समस्या हो सकती है पर दोनो का इलजा संभव हो जाता है।
इलाज मे काफी देर हो जाने के बाद इसमे जटीलता आने लगती है और दर्द लगातार बना रहता है, तो देखा गया है की इस तरह के परिवर्तन कैंसर की और अग्रसर हो जाते है। शुरुआती समय मे इसको भी सही किया जा सकता है लेकिन समये के साथ इसमे जटीसता दवा के प्रभाव को कम कर देता है। ऐसे मे एक लम्बे और संयम के साथ दवा लेनी परती है तथा जांंच भी लगातार करवानी पर सकती है। पुरी प्रक्रिया को काफी करीव मे देखभाल की जाती है और पिर विमारी ठीक हो जाती है।
दुध पिलाने वाली माता को बच्चो को दुध पिलाने के साथ बनने वाली दुध के विषय मे जानना जरुरी है। यदी दुध कम हो और बच्चे दुध को अधीक देर तक चुसता/चुसती रहे या दुध अधिक हो और बच्चे के द्वारा दुध कम पीया जाय तो दुध के छाती मे जमा होने से भी परेशानी हो जाती है। दुध अधिक बनने और बच्चे को नही पिने या कम पिने के कारण दुध को दवाकर बाहर फेकने की प्रक्रिया को समझने की जरुरत है। ऐसा कुछ दिन तक करते रहने से दुध बनने की प्रक्रिया स्वतः कम हो जाती है ओर विमारी होने की भी अंदशा कम रहती है। इसका ख्याल रखा जाना चाहिए।
एक बार जब गाठ बनने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है तो फिर दवा के सिवा दुसरा कोई उपाय नही है जिससे की इसको ठीक किया जा सके। इस तरह के विमारी को समझकर ही इसको सही तरह से इलाज करने की जरुरत होती है जिससे की इसको समय के साथ ठीक किया जा सके। आबतक के अनुभव से ये ज्ञात हुआ है कि इस विमारी को पुर्नतः ठीक किया जा सकता है।
हमारे यहां होमिलयोपैथिक दवा से कई छाती के गांठ को ठीक किया जा चुका है आपको भी समय के साथ होने वाली परेशाने से बचने के लिए जल्दी ही दवा की शुरुआत कर देनी चाहिए जिससे की विमारी को समय से ठीक किया जा सके।
उदाहरण 1 एक 32 वर्षिय महीला को दाहीना छाती मे गाठ की शिकायत थी गांठ नेपल के नीचे बाहर के तरफ थी। कभी -कभी दर्द महसुस होती थी। कई डॉ से इलाज करा चुकी थी लेकिन निराश के सिवा उन्हे कुछ हाथ नही लगा। 2025 के जुलाई महीने मे इलाज के लिए आयी उसको एक नर्श से परिक्षण कराया गया तो गांठ मुलायम और लगभग 3.5 इंच लम्बा और 1.5 इंट चौड़ा तथा .5 से 1 इंच मोटा था। इलाज की प्रक्रिया शरु की गई चार तरह के दवा दिये गये। पहले महीने मे उसका फायदा हुआ और हल्का कमी महसुस हुई। दवा जारी रही और दुसरे महीने ने वहुत लाभ हुआ। तिसरे महीने मे थोड़ा बच गया था। चौथे महीने से कब ठीक हो गया। इसके साथ उसके मासीक मे तेज दर्द की भी सिकायत रहती थी और बजन भी कम हो रहा था। पुरी प्रक्रिया को सही होने के साथ ही उससी सारी समस्या पुरी तरह से ठीक हो गई।
उदाहरण 28 वर्षिय एक महीला को दो इंच लम्बा ओर कुछ मोटा और थोड़ा चौरा गाठ वायं छाती मे नेपल के सटे नीचे था। जांच करायी गई को बेनाईन ट्युूमर की शिकारय बताया गया। इसके बाद यह विमारी हमारे पास आयी तो इसका दवा किया गया दो महीने के दवा के बाद उसका सबकुछ ठीक सा हो गया लेकिन उसने इसका ख्याल नही किया। इसमे फिर शिकायत हुई इस बार उसके मासीक मे गरवरी के साथ पेट खराव रहने की भी शिकारय थी। पुरी प्रक्रिया को इलाज किया गया और दो महीने के बाद उसके सारी समस्या दुर हो गई।
दवा को समय और विमारी को परिस्थिती के अनुसार दि जाती है और इसका ख्याल रखा जाता है। यहां दवा के नाम नही दिये जा रहे है इसका कारण विमारी को गंभिरता को समझना की जरुरत है। विमारी को समझने और उसके सही तरह से इलाज की जरुरत होती है जिससे की उसमे किसी तरह की किंतु परंतु की शिकायत नही रहे।
लेखक एवं प्रेषकः डॉ अमर नाथ साहु
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