सावाडिला मेडिसिन,   Sabadilla

सावाडिला
सावाडिला होमिया पैथिक दवा

 

 

मैक्सिको मे पाया जाने वाला सावाडिला का पौधा अपने एक अलकेलोवाईड के कारण बेहद जहरीला होता है। दवा के लिये इसके बिज का प्रयोग किया जाता है। यह पौधा हर्व के प्रकार मे आता है। प्याज की तरह दिखने वाला यह पौधा होता है। इसके बिज के जहरिला होने के कारण इसका प्रयोग किडो-मकोड़ो के मारने के काम मे आता है।

सावाडिला का प्रयोग होमियो पैथिक दवा के रुप भी मे किया जाता है। इस होमियो पैथिक दवा का प्रमुख प्रभाव मुख्यतः नाक के श्लेष्मा झिल्ली तथा आंख से आंशु निकलने वाली ग्रंथी पर होता है। इस दवा का लक्षण सर्दि-जुकाम तथा एलर्जी के कारण होने वाले बुखार के लक्षण से मिलता जुलता है। जिसके कारण सर्दि-जुकाम की सिकायत रहने वाले रोगी को यह दवा ज्यादा लाभ देता है।  इसका रोगी ठंढ़ा के प्रती ज्याद संवेदनशील होता है, यानी की हमारे आसपास के वातारवरण मे ठंढ़ा के प्रकोप बढ़ने के साथ ही इसके रोगी को बिमार होने की संभावना वढ़ जाती है। इसलिए इसका रोगी ठंढ़ से बचने का प्रयास करता है। इसके रोगी को गर्म भोजन तथा गर्म पानी पिने से लाभ होता है।

इस दवा का प्रयोग नाक  तथा आँख के अलावा गला, कंठ, अमाशय और त्वचा पर भी देखने को मिलता है। गला की शिकायत जैसे कुछ अटका होने की अनुभुती का होना होता है। पेट के उपरी भाग यानी अमाशय मे दर्द का होना लेकिन प्यास का नही लगना और कुछ गर्म खाने या पिने की ईच्छा का होना देखा जाता है।

महिलाओ मे महीनवारी मे अन्तर यानी नियमित नही होना या देर से होने की शिकायत होता है। त्वचा के शिकायत मे नाखुन के आकार का सामान्य नही रहना तथा उसका मोटा होना भी होता है।

सर दर्द के शिकायत मे चक्कर आना तथा ऐसा महसुस होना की वस्तु एक दुसरे के चारे ओर घुम रहा है। कभी-कभी आँखो के सामने अंधेरा भी छा जाता है। कमजोरी की भी शिकायत रहती है।

नोटः- दवा का प्रयोग किसी होमियो पैथिक डॉ के देख रेख मे ही करें। उपरोक्त जानकारी दवा के प्रभाव को समझने के ख्याल से दि गई है। किसी जानकारी के लिए सम्पर्क करें।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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