त्वचा की बिमारी

त्वचा हमारे शरीर का वाहरी आवरण है जो हमे वातारण मे होने वाले हलचल की जानकारी देता है तथा इससे सुरक्षा भी प्रदान करता है। हमारा शरीर सामान्य वाहरी आधात तथा हल्के संक्रमण को सहन कर सकता है। जिससे लगातार हमारी सुरक्षा बनी रहती है। लेकिन किसी बिशेष प्रकार का संक्रमण यदि होता है तो इसके लिए हमें कुछ खास तरह की सावधानी की जरुरत होती है। जिसके बाद हमारा शरीर पुनः स्वस्थ्य़ बना रहता है।

संक्रमण तथा सावधानी के संतुलन का ये दौर लगातार चलता रहता है। जिसमे हमारे शरीर की सुरक्षा प्रणाली का वहुत बड़ा योगदान है। जिसके सहारे हमारा मानसिक संतलुन बना रहता है और हम आनन्द की अनुभुती करते रहते है। त्वचा की सामान्य रुप से संक्रमण होने के बाद यदि यह स्वयं ठीक नही होता है और समस्या कुछ दिन तक बनी रहती है तो यह सावित हो जाता है कि हमारे शरीर के पास इसके निदान को कोई उपाय अब नही है। तभी हम इसके निदीन के लिए बाहरी उपाय की सोचते है। अंततः वात दवा की आती है। आजकल बाजार कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध जो आसानी के साथ आप तक पहुंच रखते है साथ ही इनकी जानकारी भी पहुँच जाती है। इसका ततकालिक प्रभाव आपको प्रभावित भी करता है लेकिन समस्या का स्थाई समाधान नही निकलता है।

समस्या के स्थाई समाधान के लिए भी कई तरह के सुविधा उपलब्ध है। जो सुविधा आपके पहुँच मे है यदि उससे आपके समस्या का सामाधान नही निकलता है तो आपकी चिंता बढ़ने लगती है। ऐसी समय पर आपके लिए होमियोपैथिक की व्यवस्था कारगर सावित होती है। कहते है कि तवतक बहुत लेट हो चुका होता है। वीमारी आपनी गहरी पैठ बना चुका होता है। आजकल की भागमभाग जिंदगी मे समय और धन दोनो की कमी रहने कारण भी समस्या उलझ जाती है।

समय के साथ त्वचा की बीमारी का सही ईलाज हो इसके लिए आप शुरु से ही होमियोपैथिक चिकित्सा का सहारा लें जिससे की आपकी शरीरिक सुरक्षा स्तंभ मुजबूत बना रहे और आप जीवन के वास्तविक आनन्द का अनुभव कर सके। यहां कुछ जानकारी को साझां किया जा रहा है। क्योकि आजकल सुचना क्रांती के इस युग मे बहुत सारे लोगो के मन मे ऐ आशांका उठती है की आखीर स्वयं को कैसे व्यवस्थित करे की इस तरह की बीमारी का समाना नही करना परे। हमारे यहां से आप ईलाज के साथ यह सुविधा प्राप्त कर सकते है। जिसमे भविश्य मे होने वाली बीमारी के लिए जुरुरी निर्देश के साथ उपाय भी बतलाये जाते है।

त्वचा मे अनेक प्रकार की बिमारी भिन्न-भिन्न करणों से होती है, जिसमे कुुछ विमारी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क मे आने से होता है, तो कुछ वीमारी आंतरीक गड़बड़ी होने के कारण से होती है। कुछ खानपान की गड़बड़ के कारण तो कुछ अलग कारणो से भी हेता है। होमियो पैथिक विधि से ईलाज होने पर यह बिमारी पुर्णतः ठीक  हो जाता है और इसके दुवारा लौटने की संभावना भी नही रहती है। हां एक महत्वपुर्ण बात भी होता है कि दुसरी कोई नयी बीमारी नही होता यानी ईलाज जिस बीमारी की होती है वही ठी क होता है और इसका कोई बिपरित प्रभाव हमारे शरीर पर नही परता है। होमीयोपैैथिक मे त्वचा की बीमारी का कारगर ईलाज काफी उपयोगी साबित होता है।

प्रमुख बिमारीयॉ

  • दिनाय
  • खाज-खुजली 
  • अपरस
  • कलकल

विवरणः-

दिनाय or Ringworm

दिनाय

इस रोग की शुरुआत सामान्य खुजली से होता है। धीरे-धीरे यह लाल रंग का गोला आकार का बन जाता है। यह नया या पुराणा दोनो रूप मे  रोगी  मे पाया जाता है। खुजली वाले स्थान के जगह से त्वता हल्कि बनकर निकलने लगता है। सामान्यतया यह गोलाकार होता है जो किनारे के तरफ लाल दाना होता है जो ज्यादा खुजली करता है। जबकि बिच वाला भाग चिकना दिखाई पड़ता है।  पुराणा परने यह जगह काला पर जाता है। इसे काछ लगना भी कहते है। शुरूआत मे यह विमारी लाल-लाल दाना के साथ गोल आकार मे होता है। संक्रमण के बाद इस स्थान पर से मवाद भी आने लगता है। अतः समय के इसका इलाज कराना चाहिए।

          एक स्थान से खुजलाकर दुसरे स्थान पर खुजलाने पर वहाँ भी होने की संभावना बनी रहती है। आतः बिमारी वाले स्थान को खुजलकर हाथ धो लेना चाहिए।

लक्षण

  • तेज खुजली होना
  • खुजलाते-खुजलाते ब्लड का आना
  • गोलकार लाल दाना का स्थान
  • गहरा लाल का बनना
  • धिरे-धिरे काला पर जाना
  • इसके अंदर गांठ का बनना
  • गांठ मे मवाद का बनना
  • एक स्थान के सम्पर्क से फैलता है।

स्थान

  • सामान्यतया जांघ के पट्टे मे
  • एक स्थान से खुजलाकर दुसरे स्थान पर खुजलाने पर
  • शरीर मे कहीं भी।
  • सिर के ऊपर
  • कमर वाले भाग पर

कारण

  • संक्रमण का होना
  • एक व्यक्ति से दुसरे मे फैलता है।
  • फंगल संक्रमण
  • रोग निरोधक शक्ति का कम होना
  • पसिना का ज्यादा निकलना
  • सफाई का समुचित ख्याल नहीं रखना।
  • एक स्थान से खुजलाकर दिसरे स्थान पर खुजलाने वहां भी हो जाता है।

निदान

  • एक स्थान से खुजलाकर दुसरे स्थान पर न खुजलावे।
  • खुजलाने के बाद हाथ साफ करें।
  • संक्रमित व्यक्ति का कपड़े का स्तेमाल न करें।
  • कपड़े को धुप मे सुखावे।
  • सेक्रमित स्थान पर साबुन का प्रयोग न करें।
  •  हल्का गुनगनुना पानी से संक्रमित स्थान को साफ करें।
  • दवा का प्रयोग करे।

जटिलता

  • लम्बे समय बना रहता है
  • संक्रमित स्थान का काला पड़ना
  • संक्रमित स्थान पर गांठ बन जाता है
  • लगातार इसका अकार बढ़़ता जाता है
  • गांठ से मवाद आने लगता है
  • दुसरे बिमारी को आने मे सहयक बनता है

बचाव

  • दुसरे के टावल या अन्य कपड़े के उपयोग से बचें।
  • रोग-निरोधक ताकत को बनाये रखें।
  • साफ-सफाई का पुरा ख्याल रखें।
  • संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क मे न अवे।
  • कपड़े को धुप मे सुखावे।
  • जांध के पट्टे को अधीक देर तक गीला न छोड़े।

दबाई

  • संक्रमित स्थान बाहर से दवा लगाना
  • खाने वाली दवाई जो बिमारी को अंदर से ठीक करता है
  • होमियोपैथिक दवा अति उपयोगी है।

अनुपयोगी तथ्य

  • कई प्रकार के लोसन का उपयोग करना
  • प्रचलित विधि को अपनाकर अजमाना
  • जलाने वाली दबा को लगाना
  • तेल लगाना
  • सेबुन लगाना
  • पाउडर लागाना

शंका निवारण

  • यह ठीक नहीं होता है।

ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह बिमारी पुरी तरह से ठीक हो जाता है। लम्बे समय तक ठीक रखने के लिए उपरोक्त करीके का उपयोग करें। संक्रमण के जटीलता के आधार पर त्वचा के बिमारी मे होमियोपैथिक दवा कुछ दिन खाना पड़ता है।

  • यह नुकसान देह नहीं है।

इस बिमारी  के लम्बे समय तक बने रहने पर कई प्रकार की अन्य बिमारी का संक्रमण हो जाता है। यह पुरे शरीर मे फैल जाता है। इसलिए समय से सही ईलाज करावे।

  • मेघदिनाय क्या है।

यह दिनाय सामान्यतया बदलिदार मौसम के बनने पर निकलता है तथा मौसम के सही होने पर स्वतः ठीक भी हो जाता है, लेकिन वास्तविक तौर पर यह ठीक नही होता है। अतः इसका ईलाज कराकर पुर्णतः रोग मुक्त हो जाये।

  • लोसन की उपयागीता कितना सार्थक है।

लोसन रोग को बाहर से ठीक करता है। अंदर बीमारी अपने रूप मे पड़ा रहता है तथा समय के साथ जटील बनकर बाहर निकलता है। पहले से अघिक प्रभावि होने कारण लोसन के बदलकर लगाने पर अराम मिलता है लेकिन प्रकृया वही बनी रहती है। आतः इसका ईलाज अंदर की दवा तो खाकर बिमारी सो रोग मुक्त हो जाना चाहिए। कई दबा कुछ समय के लिय आराम देता है लेकिन होमियोपैथिक दबा से दिनाय पुरी तरह ठीक हो जाता है।

सम्पर्क सुत्र

आप हमारे सम्पर्क नम्बर 8051339997 पर कॉल कर सकते है। मेल  या मैसेज की भी सुविधा है। दवा मंगवा भी सकते है।

बिस्वास 

दवा खाने तथा सावधानी के उपयोग से बिमारी पुरी तरह ठीक हो जाता है और आपकी स्वस्थता बनी रहती है। यह हमारे अनुभव से ज्ञात साक्ष्य है। अतः यह परी तरह से बिस्वास के योग्य है।

Skin Disease curation

Skin is jack of all trade. It gives protection of our body.It is by persons at birth time to death. We make clean it by several means. After all affection takes place. First local treatment is applied for curation.

Secondly we apply medicinal treatment. Partially or fully control of disease took places. Sometimes skin disease is not fully cure and repeat on periodical manner. Many short term treatment is applied but ultimately result is not achieved. Facial expression is fully based on our skin. Any defect may cause our impression damage. So it is maintained by at any cost.
We treat many skin disease and have full data for its study. I regularly monitor curation of disease with time and success. My regularly deep observation makes my confidence high on my treatment. I regular monitor disease by medicine administration till final result is achieved.

A proper guideline is applied for making healthy in coming life. Our guideline make many person healthy from long duration. They easily analyze their disease if they did not follow guideline. So my treatment is very valuable and long time function for better presentation of life.

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