
छाती मे दुध का बनना
बच्चो के लिए दुध संपुर्ण आहार होता है। बच्चो को दुध पिलाने के लिए दुध का समय से बनना जरुरी होता है जिससे की बच्चो का भरपुर पोषण मिल सके। गर्भवस्था के दौराण भरपुर भरपुर पोषण की जरुरत होती है जिसको समय के साथ पुरा करने पर दुध बनने की समस्या नही आती है। इसके लिए आयरण फोलीक एसीड के साथ कैलसियम को गोली भी लेनी होती है। जरुरत के हिसाव से इसको दी जाती है इसके लिए डॉ से मिलने की जरुरत है।
दुध बनने के लिए गर्भवस्था की 9 महीने पुरा होने के बाद होने वाले बच्चे के लिए दुध की तैयारी पुरी हो गई होती है जिससे बच्चे के जन्म के बाद दुध जल्दी आ जाता है। भरपुर दुध के लिए खान पान का उचीत ख्याल रखना जरुरी है। यदि सही खानपान के बवजुद दुध नही बनता है तो दवा लेने की जरुरत है। दवा को समय से देने के बाद दुध बनने लगता है।
कभी-कभी सही तरह से छाती का विकाश नही होने के कारण भी दुध बनने की समस्या होती है इसके लिए समय से दवा लेने की जरुरत होती है। एक सही उम्र के बाद ही छाती के बिकाश की प्रक्रिया होती है। इसलिए गर्भवती होने के लिए सही उम्र के बाद ही इसको अपनावे। छाती के आकार प्रकार के वारे मे ऐसा देखा गया है कि यह वंशानुगत होता है। फिर भी बाजार मे कई तरह के व्यवस्था है जिससे की छाती के विकाश की प्रक्रिया को पुरा किया जा सकता है।
होमियोपैथिक के दवा के द्वारा भी सही तरह से इलाज के बाद छाती को पुरी तरह से विकश करने मे मदद मिलती है। साथ ही दुध कम होने के लिए भी दवा दी जाती है तो दुध बनने की मात्रा के साथ दुध की गुणवत्ता भी अच्छी हो जाती है। इसके लिए लगातार ध्याण देने की जरुरत होती है।
हार्मोन की गरवरी को ठीक किया जा सकता है। यदि किसी दवा के प्रभाव के कारण दुध बनने की प्रक्रिया मे बाधा आती है तो इसका भी निदान संभव है। समय के साथ होने वाले कारण का पता लगाकर इसका निदान करते हुए पुर्णता को पाया जा सकता है।
आजकल बाजार मे मलने वाले दुध की गुणवत्ता के जितने भी दावे किये जाय मां के दुध का मुकबला नही कर सकता है। इसलिए अपना दुध ही बच्चो को पिलावें और ब्च्चो के सुखद भविश्य की एक अच्छी बुनियाद रखे।
तनाव, रोग ग्रस्त तथा एक लम्बे विमारी के बाद भी कई तरह की विसंगतियां शरीर मे आती है जिससे भी दुध बनने कि प्रक्रिया बाधित होती है। इसको सही ईलाज से ठीक किया जा सकता है। बहुत सारे लोग इसका लाभ उठा चुके है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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