स्तन कैंसर
Breast cancer

स्तन कैंसर की समस्या वर्तमान समय मे महीलाओं मे बढ़ती जा रही है। इसका कारण बदलती जीवन शैली को माना जा रहा है। स्तर की कोशीकाओं मे समान्य स्त्राव की गंथी होती है जो दुध बनाने के कार्य करती है। इसके कार्य मे किसी तरह की अनियमिता आने के कारण इसके कोशिका मे बदलाव होने लगता है। ये बदलाव तो शुरुआती दौर मे एक गांठ के रुप मे होती है। धीरे-धीरे ये गांठ बड़ा होने लगता है और इसके बृद्धी की गति तिव्र हो जाती है।
इसके शुरुआती लक्षण स्तन मे बाहरी त्वचा मे बदलाव, कांख मे गांठ का बनना, नेपन या चुचुक से मबाद या ऐसे ही किसी पदार्थ का स्त्राव होता है। जिससे की इसके शुरुआती लक्षण के रुप मे देखे जाते है। इस तरह के किसी भी सिकायत के मिलने के बाद तुरंत जांच करानी चाहिए। मेमोग्राफी से स्तर ने ट्युमर की अवस्था की जांच की जाती है। इसके बाद यदी इसके आकार प्रकार मे बदलाव देखे जाते है तो आगे की जांच करायी जाती है। जो गांठ के अंदर से कोशिका निकालकर उसके अवस्था की पता लगाते है इससे पता चल जाता है कि इसमे गांठ है या नही अगर किसी तरह के अनियमितता दिखाई देती है तो उसके निदान के लिए प्रयास शुरु कर दिये जाते है।
यदि स्तर कैंसर की कोशीका चौथे अवस्था मे पहुँच जाती है तो इसका इलाज मुश्किल हो जाता है क्योकि कोशिका का एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाने की क्रिया शुरु हो जाती है। जिसको नियंत्रण करना कठीन हो जाता है। इसके लिए समय से इलाज कराने की जुरुरत है। स्वयं से पता लगाने के लिए हाथ से गांठ को महसुस किया जा सकता है। नेपल या चुचुक का अंदर की तरफ घस जाना भी एक उपयुक्त पहचान है।
कई बार घाव बनने के कारण इसमे मवाद भर जाता है। जो ठीक भी हो जाता है पर बार-बार यह प्रक्रिया दोहराई जाती है तो कैंसर की अवस्था आती है। कैंसर बनने के कोई शुरुआती लक्षण नही है जिससे की प्रमाणिक तैर पे ये कहा जाय की इसके क्या तरीका है। आपकी सावधानी और हल्की परेशानी और जागरुकता आपके आने वाले कल तो वेहतर बना सकता है।

उदाहरणः एक महीला को स्तन मे हल्की गांठ थी और स्तन का आकार भी सामान्य ही लग रहा था। कुछ दिनो से उसके दर्द की शिकायत थी तो उसका लगता था कि यह एक सामान्य घटना है जो मासिक के परिवर्तन के समय महिलाऔं मे होती है। इसके कारण वो इसको गहराई से नही लिया। फिर दर्द की समस्या लगातार बनी रहने लगी और नेपन भी ह्ल्की अंदर के तरफ जाने लगी तो उससे इसका पता लगवाया तो पता चला कि स्तन के कोशीशा मे Metastatic change हो रहा है। यानी की स्तन के कोशीका अनियंत्रित तरीके से बदल रहा है। उसके इसके इलाज के लिए जो व्यवस्था वतलाई गई उसके लिए उसे तैयार होना कठीन था। मैने इस केश का इलाज किया लेकिन उसको जल्दवाजी थी तो उसने इसके ईलाज दुसरे जगह से करवाले लगी। इसके बाद भी उसके दर्द मे कोई आपेक्षिक सुधार नजर नही आ रहा था। यहां पर कहना है कि यदि आपके ईलाज मे कोई समय के साथ परिवर्तन नही नजर आवे तो इसको तुरंत ही उच्च चिकित्सा से जाच कराकर आपना लाभ उठावें।

उदाहरण 2 एक महीला को एक स्तन को काट के हटा दीया गया था क्योकि इसमे कैंसर के सिकायत थी। इसके बाद ओ मेरे पास आई तो जांच से पता चला की इसके दुसरे स्तन के कांख के लिंफ कोशीका भी प्रभावित है तो संभावना बनती है कि इसको दुसरे स्तन मे भी बिमारी फैल जाये। इसको जहां से इलाज हुआ था वही पर आगे कि प्रक्रिया के लिए भेजा गया। निश्कर्ष कैंसर के सुरुआती लक्षण मे बार-बार संक्रमण का होना और सही से ठीक नही होना होता है जिससे की समस्या बड़ी हो जाती है। इसके लिए समय से सम्पर्क करने पर इलाज होगा और विमारी पुरी तरह से ठीक हो जायेगा।
हमारे पास कैंसर की दवा है लेकिन इसके प्रमाणिक इलाज के लिए हमरे प्रयास जारी है। क्योकी जो भी विमारी कैसर के प्रमाणिक आती है तो उसके प्रारंभिक इलाज को देखते हुए यदी सुधार होता है तो इलाज किया जाता है यदि कोई परिवर्तन नही होता है तो उच्च चिकित्सा के स्थानिंत्रित किया जाता है। आप इसके लिए पुरी तरह से सुरक्षित महसुस करते है जिससे की आपके इलाज मे किसी तरह के विलम्ब ना हो और आपको समय का पुरा लाभ मिले।
आजकल प्रमाणिक इलाज ही व्यक्ति को संतुष्ट करता है इसके लिए हमारे द्वारा किये जा रहे प्रयास हमे संतुष्टी देते है और हम अपनी इस व्यवहार के लिए जाने भी जाते है। रोगी को उसके उचीत परमर्श के साथ समुचित इलाज जिससे की रोगी को पुर्ण संतुष्टी हो हमारी इसी प्रयास को सराहा जा रहा है। जिससे की सतत आगे बढ़ने के हमारे प्रयास को बल मिला है। आने वाले समय मे हम एक प्रमाणिक इलाज लेकर आयेंगे आपके सहयोग की अपेक्षा है एक बार जरुर मिले जिससे की आपके सुखद भविश्य मे हमारी भी योगदान हो। कल्याण हो।

लेखक एवं प्रेषकः डॉ अमर नाथ साहु

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