Viral Infection
भाईरल संक्रमण
परिचयः- भाईरस का बर्गीकरण सजीव एवं निर्जीव के बिच मे किया गया है यानी न तो यह पुर्ण रुप से सजीव है और न ही पुर्ण रुप से निर्जीव है। यह जब शरीर के बाहर रहता है तो निर्जीव रहता है। लम्बे समय तक अपने इसी रुप मे परा रहता है। भाईरस के संक्रमण के फलस्वरुप यह मानव शरीर मे पहुँचता है, तो अपने को मानव शरीर मे कई गुणा बृद्धि कर लेता है। तब इसको सजीव माना जाता है। संक्रमण की दर को मापने के लिये भाईरल लोड को मापा जाता है। भाईरल लोड बढ़ने के कारण समस्या जटील होने लगता है। जिससे बिमारी की स्थिती तथा रोगी को निरोग होने की क्षमता का पात चलाता है। शरीर मे रोग निरोधी ताकत मजबुत रहने पर यह सिथिल पर जाता है। होमियो पैथिक दवा यही काम करता है। शरीर मे रोग बिरोधी ताकत को बढ़ा देता है। खास तरह की दवा को देकर शरीर की सक्रियता को जागृत करने पर हमारी आंतरिक शक्ति कम करने लगती है।
स्त्रोतः-
भाईरस के संक्रमण का स्त्रोत मुख्यतः है- हमारे आँख, कान, नाक, मुख तथा शरीर और वह भाग जो टुट फुट के कारण वाताबरण के सम्पर्क मे रहता है। शरीर को सापेक्ष या परोक्ष रुप से इसके सम्पर्क मे आने पर यह भाईरस जब हमरे अंदर चला जाता है, तो यह सक्रिय होकर जिवित रुप धारण कर लेता है। जिसके बाद इसका बिनाशकारी रुप देखने को मिलता है।
प्रतिरक्षा प्रणालीः-
हमारे शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली हमारे शरीर को बाहरी आधात से बचाता है। जब यह कमजोर हो जाता है तो हम बिभिन्न प्रकार के बिमारी का हम शिकार हो जाते है। इसका कमजोर होना होना सभी मे एकसमान नही होता है। जिसके कारण बिमार के बिमारी भी अनेक प्रकार का होता है। होमियोपैथिक मेडिसिन भी एक ही तरह से बिमारी के लिए कई तरह की दवा हो सकती है। यह विमारी तथा व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है। जिससे हमारे शरीर मे रोग निरोधक क्षमता का बिकाश होता है। एक पतिरक्षा प्रणाली हमारे शरीर मे पहले से होती है जो सक्रिय, निसक्रिय या कमजोर हो सकती है। दुसरी प्रणाली जो बाहर से तैयार करके अंदर दी जाती है। यही दवा की प्रक्रिय अलग होती है। होमियो पैथिक प्रक्रिया का आरम्भ सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय करके होता है।
भाईरस का प्रकोपः-
कोरोना भाईरस के बारे मे बैज्ञानिक को जानकारी पहले से थी। लेकिन कोबिड 19 के प्रसार के बाद इसके बारे मे जानने की हमारी उत्सुकता काफी बढ़ गई। एन्टीबायटीक के खोज के बाद चिकित्सा जगत मे एक क्रांति का जो दौर आया, उससे मानव समाज को बिमारी को समझने का एक नया जरीया मिल गया। हमारा बिश्वास के स्तर मे उतरोत्तर बिकाश हुआ। लेकिन भाईरस के साथ ऐसा चमत्कार नही हुआ। जिससे हमे भाईरस के ईलाज मे सावधानी बरतनी परती है। एन्टीभाईरल मेडिसीन भी है लेकिन उसका प्रयोग सिमित है। होमियो पैथिक मे यह कार्य शरीर के द्वारा किया जाता है। हमारा कार्य सिर्फ शरीर को बह टास्क देना होता है, जो सक्रिय रोग जनितभाईरस नही देता है। जिसके बाद यह कार्य संपादित होता है। बाहर से विकसित सुरक्षा कबच डालकर जो शरीर को बचाया जाता है। बह आगे चलकर एक समस्या बनकर उभरता है। लेकिन होमियो पैथिक दवा के साथ ऐसा नही होता है। व्यक्ति लगातार रोग से लड़ने की क्षमता का बिकाश करते रहता है यदि वह होमियो पैथिक दवा मे ईलाजरत है।
कोरोना मे भी सभी रोगी मे एक समान लक्षण प्रकट नही होता है। इसका कारण उसका आंतरिक प्रतीरोधी क्षमता है। जिससे दवा मे एकरुपता नही होता है। हाँ कुछ सामान्य लक्षण को लेकर एक दवा दि जाती है जो तुरंत इलाज करने मे सहायक होता है।
लेखक एवं प्रेषकः- डॉ अमर नाथ साहु

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