विश्व मच्छर दिवस
विश्व मच्छर दिवस
मच्छर सर रोनाल्ड रॉस द्वारा 1897 मे की गई खोज से ज्यादा प्रचलित हुआ। उन्होने पता लगाया की मलेरिया इंसानों मे मादा एलोफलिज मच्छरों के काटने से होता है। इसके लिए उन्हें 1902 मे नोबेल पुरुस्कार मिला। इससे फैलने वाला बिमारी मे मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू, जीका वायरस और पीला बुखार सामिल है। मच्छर से फैलने वाले बीमारी के पता लगा हुआ काफी समय बीत गया लेकिन आज तक इसपर पुरी तरह से काबू नही पा जा सका। इसका कारण बतलाया जा रहा है कि मच्छर स्वयं को बदल ले रहे है। जिस दाव का उपयोग उसको मारने के लिए किया जाता है समय के साथ उसका प्रभाव उसके ऊपर नही परता है। धिरे-धिरे उसमे बदलाव आ जाता है जिसके कारण उसका प्रभाव उसके उपर नही परता है। यही कारण है इसके नये नये अपरुप आते रहते है और आज मे मलेरिया से लोग परेशान है।
प्रकृति का अदभुत रचना है जिसको कोई नही बचाने वाला हो उसका भगवान होता है ऐसा कहा जाता है। वो आज उसके जीन मे हो रहे बदलाव से समझा जा सकता है। विज्ञान जैसे – जैसे आगे बढ़ता जा रहा है नयी-नयी बीमारीयां का सामना करना पर रहा है। कहीं कही तो वही पुरानी बीमारी नये रुप मे आ जाती है। कहा जाता है कि एम्युन पावर को बढ़ाना परेगा। फिर इसके लिए प्रयास चलने लगते है। जो भी हो विज्ञान के सहारे चलने वाले जीवन को अब मच्छर से बचने के लिए मच्छर दानी ही उपयुक्त उपाय लगता है। इसके साथ कहा जाता है कि मच्छर के लार्वा ना पनपे इसके लिए आसपास पानी जमने न दें। अपनी सावधानी को और आगे बढ़ावे और पुरी बांह कपड़े पहने, मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करे। इसके बाबजुद यदी मलेरिया हो जाय तो दवा का उपयोग करे।
कहा जाता है कि सावधानी सबसे बड़ी दवा है तो उपाय तो करना परेगा। मच्छर भलेही आपको बीमारी न फैलाये पर आपको परेशान जरुर करेगा। विश्व मच्छर दिवस मच्छर के बदलते अपरुप के लिए अब अस्थाई उपाय ही समझा रहा है क्योकि उसकी सुरक्षा प्रकृति कर रही है। सावधानी बरते और समय के साथ मच्छर से होने वाली बीमारी से सावधान रहे और समय से अपना ईलाज करावे और स्वस्थ्य रहे सुखी रहे। आपकी ये जिम्मेदारी है कि लोगो को जागरुक करते रहे जिससे की इसके फैलाव को रोका जा सके। लोगो की जागरुकता ही इसके फैलाव को रोक सकता है। यदी सुझाये गये सारे उपाय किये जाय तो वो दिन दुर नही जब हम सबको इस परेशानी से छुटकारा मिल जाय।
तालाब मे गंबूसिया मछली को डालने से ये मछली के लार्वा को खा जाती है जिससे इसके प्रसार को रोका जा सकता है। प्राकृतिक रुप से जहां भी मच्छर है वहां पर यदी पानी ज्यादा है तो आप तेल डाल सकते है जिससे की इसका लार्वा पानी मे डूब जाता है। इस तरह के उपाय करके मच्छर को रोका जा सकता है। मच्छर दिवस पर जन जागरुकता अभियान चलाकार लोगो को जगरुक करना जरुरी है जिससे की बिमारी से होने वाले परेशानी को रोका जा सके। सबको अपनी जीम्मेदारी निभानी होगी तभी ये मिशन पुरा होगा और तब शांति से कभी भी बैठ सकते है नही तो परेशानी का सामना कही न कही तो करना परेगा।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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