Adarsh Homoeo Clinic.com Festival विश्व अंगदान दिवस

विश्व अंगदान दिवस

विश्व अंगदान दिवस

अंगदान के महत्व को समझना जरुरी है। इसके बारे मे लोगों को शिक्षित करना, गलतफहमी को दुर करना, डर को दुर करना तथा अंगदान को करने के लिए संकल्प लेने के लिए प्रेरित करना एक जरुरी कदम है।। अंगदान करने वाले अंग में किडनी, ह्रदय, फेफड़े और आँख है। इसको दान करके लोगों की जान बचा सकते है। 18 साल से अधिक आयु के कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति अंग दान कर सकता है। इससे कम उम्र के व्यक्ति को अपने माता-पिता से अनुमती लेनी होगी। दाता को कैंसर, एकआईभी या किसी प्रकार के संक्रमित या पुरानी बीमारी से मुक्त होना जरुरी होता है। संक्रमित व्यक्ति के अंग लेने वाले को खतरा रहता है इसलिए इस बात का खासा ख्याल रखना होता है।

अंगदान जिवित रहते हुए और मृत्यू के बाद भी दान किया जा सकता है। जिवित रहते हुए में किडनी दान किया जा सकता है क्योकि व्यक्ति के पास दो किडनी होता है। तो एक किडनी दान किया जा सकता है। इसके लिए अब नियम बनाये गये है। दान करने वालें को अपनी पहचान बताना होता है। अंगदान करने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके लिए भारत मे परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारीक वेवसाईट अंगदान पोर्टल पर जाना होगा। यहां पर डोनर प्लेज फर्म भरकर अपनी इच्छा जता सकते है और डोनर कार्ड प्राप्त कर सकते है। यहां पर अपना नाम, जन्म तिथि, मोबाईल नम्बर, इमेल तथा आधार कार्ड सम्बन्धी जानकारी देनी होती है। किन अंगो का दान करना चाहते है उसको चुने और सहमति दें। इसके बाद डोनर कार्ड डाउनलोड कर लें।

अंगदान के प्रति जागरुकता बनाने की जरुरत है जिससे की जरुरतमंद को समय रहते असकी जान बचाई जा सके। जिस अंग को दान किया जाता है उस अंग की उस व्यक्ति को या तो उसके मृत्यू के बाद निकाला जाता है या फिर किडनी को उसके सहमति से जीवित मे ही निकाला जाता है। बहुत सारे लोगो को आकाल मौत हो जाती है जिसके बाद उसके अंग काम करने के लायक तो रहता है उसी को निकालकर दुसरे मे प्रत्यारोपित किया जाता है। कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति दिमागी रुप से मृत्य हो जाता है लेकिन उसका शरीर कृतिम रुप से संचालन के कारण जिदा रहता है। ऐसे व्यक्ति को सामान्य जीवन देना असंभव होता है। ऐसी स्थिती मे भी इसके अंग को दुसरे को दान किया जा सकता है।

अंग दान को लेकरके कई तरह की भ्रांति है इसके जानकारी के साथ जब लोग जुड़ते जायेगें तो ये लोगो  के बिच एक सहज स्वीकार्य योग्य प्रक्रिया बन जायेगी। इसके लिए जानकारी के साथ जगरुकता जरुरी है। जो लोग स्वयं के प्रती यदि निष्ठावान होते है तो संभव है कि वो दुसरे को मदद कर सकते है। 13 अगस्त के दिन को खास करके इसी भाव को जागृत करने तथा लोगों को प्रेरित करने के लिए चूना गया है। जिससे इस कार्य को करने मे आसानी हो। लाभ लेने वाले तथा देने वाला दोनो को जागरुक होना जरुरी है।

लेखक एवं प्रेषकः डॉ अमर नाथ साहु

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  • आंख दान दिवस पर आँख दान के बारे मे जानकारी ले और चर्चा करें।
  • रक्तदान दिवस पर रक्त दान करके परोकारी बने जिससे मानव कल्यान का मार्ग प्रसश्त हो।
  • पुरने बीमारी के बारे समुचित जानकारी रखते हुए खुद को स्वस्थ्य रखने मे जागरुक बने।

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