Adarsh Homoeo Clinic.com Festival विश्व आईवीएफ दिवस

विश्व आईवीएफ दिवस

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विश्व आईवीएफ दिवस

विट्रो फर्टीलाईजेशन तकनीक के द्वारा दूनीया की पहली टेस्ट्यूव बेवी लुईस जॉय ब्राउन का 1978 मे जन्म हुआ। इस तकनीक की सफलता ने उन माता-पिता को उम्मीद की किरण जगा दी जो प्रकृतिक रुप से गर्भाधान मे असमर्थ थे। इसके लिए वे  वैज्ञानिक धन्यावाद के प्रात्र है जिन्होने निःसंतान दम्मपति के जीवन को रोशन किया। इसकी सफलता का पहला श्रेय इंगलैंड के डॉ पैट्रीक स्टेप्टो और डॉ रॉवर्ट एडवर्डस को जाता है।

इसके कई चरण होते है। पहले चरण मे हार्मोण दवाओं के द्वारा अंडाशय को उत्तेजित कर अंडे को विकसित करना। दुसरा चरण विकसित अंडे को सुरक्षित बाहर निकालना। तीसरा चरण अंडे और शुक्राणु का मिलन या निशेचन कराकर भ्रूण तैयार करना। अंतिम चरण स्वस्थ्य भ्रूण को महीला मे स्थानांतरित करना। इसके बाद गर्भवती महीला को पुरे नौ महीने तक देखभाल करना जिससे की उसकी सही से बच्चा विकसित हो और बच्चे का जन्म हो। गर्भाधान के बाद कोई बड़ी समस्या नही आती है। जिसको परेशानी होती है तो वे सोरोगेट की सेवा ले सकते है।

सेरोगेट के केश मे जन्मे बच्चे के माता पिता को जैविक माता पिता और सेरेगेट माता के रुप मे जाना जाता है। इसको सरकार के द्वारा मान्या प्राप्त है। इसके बाद संतान का सुख वे दमप्तय भी पा सकते है जो पुरी तरह से संतान के लिए प्राकृतिक तरीके से बच्चे नही पा सकते है। कुछ महीला को मां बनने की चाहत होती है उसके लिए खुद मां बनने की बात भी श्रेष्कर है। कुछ महीला मां नही बनना चाहती है उसके लिए भी ये सुविधा उपलब्ध है। लेकिन अच्छा होता है कि खुद मां बनके मातृत्व का सुख प्राप्त करे जो पाकृति मे सबसे ऊपर है।  

बाझपन एक बड़ी समस्या थी जिससे कारण दाम्पत्य का पुरा जीवन अधुरा रह जाता है। इसके लिए आधुनिक विज्ञान ने एक बरदान लेकर आया है। जिससे उसके जीवन मे खुशी की लहर दौर जाती है। जीवन के खुशी के इस अनमोल पल को सबके साथ साझा करने की जरुरत है जिससे की ऐसे दम्मपत्ती जो आज भी इस तरह के विचार से अनभिज्ञ है उनका मार्गदर्शन हो और वो भी इसका लाभ उठावें।

जनकारी के अभाव और असमंजस की स्थिती कई तरह के सावाल खड़े करता है जिससे की उसके निर्णय लेने मे कठीनाईया होती है। इसको दुर करने के लिए जनजागरुकता जरुरी है। जिससे की लाभार्थी भय मुक्त का अनुभव करे और खुले मन से इसका लाभ उठावें।

जीवन को करीव से समझने वाले के लिए औलाद का सुख सबसे बड़ा होता है क्योकि वे औलाद के विकाश के हर पल का गवाह बनाता है और फिर जीवन के अंत मे उसके प्यार को पाकर अपने को धन्य करता है। इसकी खुशी सबको प्राप्त हो और सब आगे बढ़े इसकी हम कामना करते है।

लेखक एवं प्रेषकः डॉ अमर नाथ साहु

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