विश्व बाल चिकित्सा अस्थि और जोड़ दिवस
विश्व बाल चिकित्सा अस्थि और जोड़ दिवस ( World Paediatrics Bone and Joint Day )
नवजात शिशु और बच्चो मे 270 से 300 हड्डी होती है जबकि बड़ो में 206 हड्डी होती है। बच्चो की कुछ हड्डीयां कार्टीलेज की बनी होती है जो ओसिफिकेशन के बाद पुर्ण रुप से मजबुत हड्डी में बदल जाती है। बच्चो का शरीर इसलिए लचीला होता है। शोध मे ऐसा पाया गया है कि गर्भस्थ शिशु की हड्डी के जोड़ का विकाश उसके गर्भ मे धुमने से होता है। बच्चा जब अमनियोटिक फ्लूईड मे घुमता है तो उसके जोड़ मजबुत होते है। बहुत छोटा बच्चा जब बड़ा होने लगता है तो अपने हाथ-पैऱ को अधिकांश समय चालाता रहता है जिससे की उसका विकास हो और जोड़ मजबुत बने।
बच्चो के विकास के लिए जरुरी आहार के साथ कैलसियम युक्त आहार को देना ज्यादा फायदेमंद होता है जिससे की उसके जोड़ का विन्यास सही रहे। कैल्सियम नही मिलने पर बोन फ्रेजाईल हो जाता है। इसके कारण हल्की भी चोट लगने पर जोड़ के साथ ह्ड्डी भी टुटने की संभावना रहती है। इसलिए बच्चो के खान-पान अच्छा ख्याल रखना जरुरी है। यदि बच्चे के हड़्डी टुट जाय तो उसको समय के साथ सही तरह से प्रवंधन करने की जरुरत होती है जिससे की हड्डी का विकास सही से हो जाय।
पांच साल के एक बच्चे का कॉलर बोन टुट गया और टुटकर लटक गया था। डॉ ने बतलाया की ये हड्डी गल जायेगा और नया हड्डी स्वयं ही बन जायेगा और पांच साल के बाद देखा गया कि बाकई मे टुटी हड्डी खुद समाप्त हो गई और वहां पर नई हड्डी बन गई। इस तरह की जानकारी ये समझ आता है कि अनावश्यक परेशान होने की जरुरत नही है। जरुरत है कि सही जानकारी सही समय पर हो और कार्य आसानी से हो जाय़। उम्र बढ़ने के साथ ही हड्डी का बनना भी कम हो जाता है। धिरे-धिरे उम्र के साथ इसके ठीक होने की प्रक्रिया भी धीमे हो जाती है।
बच्चो के खेल-कुद मे होने वाली हल्की परेशानी को नजर अंदाज करना ठीक नही है। यदी हल्की परेशानी है यानी की केशलाईन फ्रेक्टर है तो वह खुद ही ठीक हो जायेगा जरुरत है इम्यून पावर को बढाने की तथा वहां होने वाले सुजन को ठीक करने की। यदि टूट पर गैप ज्यादा है तो उसको सही करने के लिए डॉ हड्डी को व्यवस्थित कर देता है और हड़्डी को शरीर खुद ही ठीक कर लेता है। होमियोपैथी मे हड्डी के जोड़ को सही करने की सटीक दवा है। ये दवा हड्डी के जोड़ के कैलस फोरमेसन को बढ़ाता है और हड्डी आसानी से जुड़ा जाता है। दवा को सही निर्देश के साथ लेने से लाभकारी प्रभाव देखने को मिलता है।
बच्चो के प्रती हमरी सावधानी और जानकारी हमारी समझ को गहरा करता है जो समय के साथ होने वाले बदलाव के प्रति हमे सजग बनाता है। 19 अक्टूबर का खास दिन इसी भाव को समझाने के लिए खास बनाया गया है। हमे जो मिलता है खाते जाते है और सोचते है कि सब सही हो जायेगा ऐसा नही है हमे अपने भोजन मे जरुर मंद पादार्थ को मिलाना होगा और लाभकारी प्रभाव के प्रति प्रतिबध्ता दिखानी होगी। आज के जनजागरुकता का ये दिन सबके लिए लाभाकरी प्रभाव लेकर आये हम इसकी कामना करते है और आशा करते है कि हडडी की समस्या कम होगी और उज्जवल भविश्य का निर्माण होगा।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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- दवा लेने के लिए फर्मासिस्ट की सहायता जरुर लें।
- रोगी को समय से उपचार जरुरी है जिससे की उसकी बीमारी जल्द सही हो ।
- ततकाल समस्या गंभीर होने पर प्राथमिक उपचार जरुर करे जिससे की रोगी की जान बचाई जा सके।
