विश्व रीढ़ दिवस
विश्व रीढ़ दिवस (World Spine Day)
रीढ़ की हड्डी शरीर का पुरे ढ़ाचा को खड़ा रखने का मुख्य आधार है। इसका कार्य काफी जटील है। इसके बीच मे एक लम्बी खाली नुमा संरचना होती है जिसमे की सेरेब्रेस्पाईल फ्लूईड रहता है। यह फ्लूईड काफी महत्वपुर्णो होता है। इस फ्लूईड का निर्माण मस्तिष्क के कोरोइड प्लेक्सस मे होता है और आरकेनोआईड विल्ली मे अवशोसित हो जाता है। कोरोइड प्लेक्सस रक्त प्लाजमा को फिल्डर करती है जिसके दैरान सीएसएफ यानी की सेरेब्रल स्पाईनोफ्लूईड का निर्माण होता है।
रिढ़ की हड्डी से मस्तिष्क मे आने जाने वाली मह्तवपुर्ण तंत्रिता तंत्र गुजरती है जो शरीर के नियंत्रण के लिए जरुरी संदेश का आदान-प्रदान करती है। शरीर के हर भाग मे चार तरह के कार्पशल्स होते है जो सुचना को एकत्रित करता है और सुचना को मस्तिष्क मे देता है वहां पर सूचना का विश्लेषन होता है और जरुरी आदेश संबंधित अंग को दे देता है। इसके बाद इस आदेश को भी संबंधित अंग तक पहुँचाया जाता है। ये सभी तंत्रिका तंत्र रीढ़ के हड्डी के बीच से ही पास होता है।
रीढ़ की हड्डी मे लगने वाला चोट या टुट-फुट बहुत नुकसानदेश होता है। इसकी टुट-फुट को मुश्किल से जोड़ा जाता है। इसलिए इसका ख्याल रखना जरुरी होता है। रीढ़ की हड्डी 33 वरटिब्रा का बना होता है। दो वरटिब्रा के बीच मे एक कुशन पैड की संरचना होती है जो एक दुसरे बचाव करती है और वरटीब्रा को हल्की झुकने मे मदद भी करती है। इसके दवने से इसकी संरचना बिगर जाती है और यह नस पर दवाव बनाती है जिससे की दर्द की समस्या बनी रहती है।
साईटिका का दर्द भी यही से होता है। शरीर के किसी भाग को ऑपरेशन की जरुरत होती है तो इसीके वरटेब्रा को पंचर किया जाता है। सेरब्रोस्पाईल फ्लूइड भी यही से निकाला जाता है और जांच के बाद संक्रमण का पता लगाया जाता है। रीढ़ की हड् की संचना यदी बिगर जाती है तो व्यक्ति सीधा खड़ा नही रह सकता है। इस महत्वपुर्ण अंग की सुरक्षा का पुरा ख्याल रखना जरुरी हो जाता है।
भारी सामान को उठाते समय इस बात का ख्याल रखे की कहीं किसी तरह का जर्क नही लगे जिससे की परेशानी का सामना करना परता है। 16 अक्तूबर का खास दिन इसी भाव को जागृत करने और जन अभियान बनाने के लिए बनाया गया है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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