विश्व रोगी सुरक्षा दिवस

रोग ग्रस्त व्यक्ती का जीवन दुसरे के सहयोग पर क्रियाशील रहता है जिससे वो खुद के लिए होने वाली परेशानी से मानसिक रुप से द्वन्ध करता रहता है। रोगी को सही होने के बाद वो दुवारा बीमार नही परे इसके लिए उसे सतत प्रयास करने की जुरुरत होती है। एक स्वस्थ्य मानसिकता के साथ पौष्टीक भोजन की जरुरत होती है। व्ययाम के साथ कार्य और समय प्रवंधन जरुरी प्रक्रिया है। इस तरह के व्यवस्था के साथ व्यक्ति खुद को एक लम्बे समय तक स्वास्थ्य रख सकता है।
कुछ खात तरह की आदत जैसे नशा का आदी होना, बहुत गहरी निराशा, बहुत गुस्सा, बहुत तनाव मे रहना, बहुत बड़ी लालसा जिससे हमेशा असंतुष्टी का भाव व्यक्ति को धीरे- धिरे रुग्न बना देता है जिससे उसका रोग ग्रस्त होना एक जरुरी प्रक्रिया बन जाता है। इस तरह के व्यवहार के प्रति जाकरुक होने की जरुरत होती है। समाज को इस तरह के वितार से प्रभावित व्यक्ति को सावधान करने की जररुत है जिससे की समाज को एक सुखी समाज का विचार उच्च रहे।
भोजन जो मिला खाया और किसी के साथ चर्चा नही की इससे भोजन के उत्तम गुमवत्ता प्रभावित होती है और शरीर धीरे धीरे व्यक्ति को बीमार कर देता है। इस प्रक्रिया को रोकने की जरुरत है। इसके लिए समाज मे चर्चा करनी चाहिए कि एक उत्तम व्यवस्था भोजन क्या है। खान पान और व्यवहार को सही रखने की जरुरत है जिससे जीवन को सुखमय रखा जा सके। समाज के हर वर्ग के लोग दुख और सुख मे सागिर्द होते है। चाहे अनचाहे एक दुसरे को प्रभावित करते है इसलिए एक उच्च आदर्श को अपना चाहिए और वेहतर व्यवस्था को अपना चाहिए।
17 सितम्बर का खास दिन इसी विचार को बनाने के लिए खास दिन रखा गया है। इसको समाज के जनजागरण का हिस्सा बनाने के लिए रखा गया है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
संबंधित लेख को जरुर पढे़ःॉ
