विश्व ह्रदय पुनर्जीवन दिवस
विश्व ह्रदय पुनर्जीवन दिवस (World Heart Restart Day)
ह्रदय जब एक बार धड़कना शुरु होता है तो लगातार बिना रुके अनवरत धड़कते रहता है। इसके बंद होने पर जीवन की समाप्ती मानी जाती है। बीना थके बिना रुके धड़कने वाले इस दिल को अच्छा से ख्याल रखना परता है। इस अच्छा से ख्याल रखने की क्रिया को बारीकी से समझना परता है। सीना के बांये भाग मे स्थित ह्रदय के स्थान पर किसी तरह के दर्द की शिकायत पर इसकी जांच करना जरुरी होता है जिससे पता लगाया जा सके की ह्रदय मे किसी तरह की कोई बिषमता तो नही है। किसी भी तरह के विसंगति का संदेश होने पर इसकी जांच करायी जाती है और इसका सफल इलाज किया जाता है।
मानव बड़ा ही महत्वाकांक्षी होता है जीवन प्रयंत सुख की खोज मे घुमता रहता है। यही खोज उसे स्वयं के चिंतन से दुर कर देती है और वह तनाव का शिकार हो जाता है। तनाव मे व्यक्ति का खान-पान का ख्याल नही रहता है। जिससे उसका दिनचार्या बिगर जाता है। बिगरते दिनचार्या के साथ जीता हुआ व्यक्ति कई तरह के विसंगतियों का शिकार होता है। शुरुआत मे तो वो स्वभाविक बृति के साथ जीता चला जाता है। समय के साथ उसमे उपापचय की क्रिया पुरी तरह से अनियंत्रित हो जाती है। गैस का बनाना, बाल का झरना, निद ना आना, खाना नही पचना, कमजोरी होना जैसे सिकायत मिलने लगती है। इसी व्यवस्था के बीच वह जीता हुआ रुग्नता के तरफ आगे बढता जाता है।
अनियंत्रित भोजन के कारण जब जैसा देखा वैसा खानपान को बनाते चला गया। इससे उसके घमनी मे बसा की मात्रा जमने लगती है जिससे की उसके ह्रदय को जाने वाले रक्त प्रवाह वाधित होता है। बाधित रक्त प्रवाह के कारण उसके सीना मे दर्द की शिकायत होने लगती है। समान्य सी दिखने वाला दर्द समय के साथ गहरा होते जाता है। लापरवारही के कारण उच्च रक्त चाप की माप भी समय पर नही होती है जिससे की बीमारी की गंभिरता बढ़ती जाती है। बिमारी एक दिन गंभीर स्थिती मे पहुँच जाती है। यह स्थिती बहुत ही भयावह होती है। इसमे सीना मे तेज दर्द होता है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है। यह स्थिती खतनाक हो सकती है।
ह्रदय की गति का अचानक से रुक जाने की क्रीया बहुत ही गंभीर स्थिती पैदा करती है। यहां तुरंत प्रभावित व्यक्ति को सीपीआर देना होता है। इसमे रोगी के सीने पर यानी की ह्रदय के स्थान के ऊपर एक हथेली पर दुसरा हथेली रखकर लगातार थोड़ी देर तक दवाना और छोड़ना होता है। इससे ह्रदय के मशल्स पर दवाव परता है हो सकता है कि ह्रदय की गति दुवारा चालू हो जाए और जीवन फिर से लौट आए। जीवन की इस परिक्षा को जीतने वाले बड़े ही भाग्यशाली होते है। एक बार इस तरह की समस्या से जीवन लैट जाता है तो जीवन के जीने के सारे उपाय करने की ललक एक बार फिर जाग जाती है जिससे की जीवन को एक नवीन उर्जा मिलती है।
ह्दय की गति यदि प्रभावित होती है तो इसका इलाज समय से करना चाहिए। ह्रदय की किसी भी तरह की बीमारी की अनदेखी करना खतरनाक हो सकता है। इसके लिए सतर्क रहने की जरुरत है। सीपीआर देने की कला सबको आनी चाहिए जिससे की समय पर रोगी को बचाया जा सके। पता नही किस मोड़ पर किसकी जरुरत पर जाये। 16 अक्टूबर के खास दिन को इसी विषय को जनजागरण का अभियान बनाने के लिए खास बनाया गया है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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