विश्व पोलियो दिवस
विश्व पोलियो दिवस ( World Polio Day )
पोलियो मुक्त विश्व बनाने हेतु पोलियो के टिकाकरण की शुरुआत 2 अक्टूबर 1995 की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वरा 27 मार्च 2014 को भारत को अधिकारिक तौर पर पोलियो मुक्त धोषित किया था। पोलियो की बीमारी एक वायरल बीमारी है। यह बीमारी मुख्य रुप से संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क मे आने से होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खासने और छींकने से होने वाले बुंदों के फैलने से होता है। गंदे और दुषित जल पिने से भी ये बीमारी होता है।
यह बीमारी 5 साल से कम उम्र के बच्चो मे होता है। यहा वायरस आतों मे बढ़ता है और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है। जिससे लकवा हो जाता है। इसमे मोटर नर्व प्रभावित होता है और हाथ पैर की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती है। बीमारी की जटीलता बढ़ने पर ये मस्तिष्क के निचले हिस्से को प्रभावित करती है। जिससे सांस लेने, बोलने की क्षमता प्रभावित होती है।
इसकी खोज डॉ जोनास साल्क ने की थी जिसकी घोषणा 12 अप्रेल 1955 को की गई थी। मुंह से दी जाने वाली ऑरल पोलीयो वैक्सीन की खोज डॉ अल्बर्ट साबिन ने की थी। इस दिवस को मनाने के लिए 24 अक्टूबर के दिन को खास तौर मे मनाया जाता है। इसके लिए जागरुकता जरुरी है। यदि इस तरह की बीमारी कोइ रोगी मिलता है तो उसकी ततकाल प्रभाव से जांच की जायेगी ये पता लगया जायेगा की किस तरह के वेरियेन्ट ने प्रभावित किया है और उसका निवारण का उपाय क्या है।
समय के साथ कई तरह के बीमारी दब जाता है और कई तरह के बीमारी सक्रिय हो जाते है। इस बीमारी के बारे मे जागरुकता जरुरी है जिससे की इस तरह की समस्या आने पर ततकाल से इलाज कराया जा सके। जिससे की पिड़ित बच्चो कि सही देखभाल हो सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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