एम़डीएस विश्व जागरुकता दिवस
एम़डीएस विश्व जागरुकता दिवस ( MDS World Awareness Day )
एम डी एस को माइलोडिप्लास्टिक सिंण्ड्रोम कहते है। इसमे अस्थि मज्जा प्रयाप्त मात्रा मे लाल रक्त कोशिका का निर्माण नही कर पाती है जिससे लाल रक्त कोशिका के साथ सफेद रक्त कोशीका और प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। इसमे रोगी को अध्यधिक कमजोरी, सांस फूलना, आसानी से नीला पड़ना या खून बहना तथा बार-बार दम फूलने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।
यह बीमारी मुख्य रुप मे 60 बर्ष से अधिक उम्र के लोगों मे देखने को मिलता है। इसका कारण बैंजिन जैसे रसायनों के संपर्क मे लम्बे समय तक रहने के कारण हो सकता है। यह कैसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी हो सकता है या फिर ये बीमारी देर-सबेर कैंसर मे बदल जाती है। इसमे कभी-कभी दोषपुर्ण रक्त कोशिका का निर्माण होता देखा गया है। इलाज के लिए पहले रोग का पता लगा लिया जाता है। इसके बाद रोग को ठीक करने के लिए दवा दी जाती है।
इस तरह के बीमारी के लिए CBC की जांच जरुरी होती है जिससे की पता चल जाता है की लाल रक्त कण की मात्रा के साथ सफेद रक्त कण और प्लेटलेट्स की मात्रा कितनी है। यदि सामान्य इलाज से कोई बिशेष प्रभाव नही परता है तो इसको गहराई तक जाकर जांच कराना और इलाज को सही समय पर शुरु किया जा सकता है। बीमारी के लक्षण आने पर रोगी को जरुरी जांच कराते हुए सही इलाज के लिए प्रयास शुरु कर देनी चाहिए। शुरुआत के समय मे यदि पता चल जाय तो इलाज संभव हो जाता है।
बीमारी की जानकारी होने पर समय के साथ व्यक्ति की सतर्कता काफी काम आती है। इसके लिए ही 25 अक्टूबर के दिन को खास बनाया गया है जिससे की लोग अपनी सतर्कता के साथ इलाज करावे और उचीत समय का लाभ लेते हुए सतर्कता बरते। जानकारी होने पर खतरनाक रसायण के संपर्क मे आने से परहेज भी किया जा सकता है। इस लिए आज के खास दिन के जानाकारी को आदान-प्रदान करने की जरुरत है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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