विश्व मिसोफोनिया जागरुकता दिवस
विश्व मिसोफोनिया जागरुकता दिवस ( World Misophonia Awarness Day),
मिसोफोनिया एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिती है, जिसमें कुछ विशेष प्रकार की समान्य ध्वनियों के प्रति मस्तिष्क की संवेदनशील अधिक हो जाती है जिससे पिड़ित व्यक्ति असहज महसुस करने लगता है। इस विशेष ध्वनी के प्रति मस्तिष्क की प्रतिक्रिया अत्यधिक भावनात्मक हो जाती है। इस प्रकार की ध्वनी से उस व्यक्ति को घृणा हो जाती है जैसे की मुँह से खाने की आवाजें, सांस लेने की आवाजें, पेन क्लिक करने, उंगलियों से मेज थपथपाने, घड़ी की टिक-टिक करने आदि।
इस प्रकार की ध्वनी से पिड़ित व्यक्ति में होने वाली परेशानी में अत्यधिक घबराहट या पैनिक अटैक का होना, दिल की घड़कन का तेज होना, मांसपेशियों मे खिंचाव का होना, वहां सो दुर भाग जाना, आक्रामक होने की तीव्र इच्छा का होना जैसे लक्षण देखे जाते है। इस तरह की स्वभावकि प्रतिक्रिया के प्रति लोग सहज नही होते है। इसलिए इस तरह की बिमारी से पिड़ित व्यक्ति की भावना को समझने की जरुरत है और उसके साथ सहयोग की विचार को रखते हुए समान्य व्यहार को बनाने के लिए ही आज के दिन को जगरुकता के लिए रखा गया है। लोगों की इस तरह की जानकारी से अवगत होने के बाद लोग स्वतः ही इस तरह के व्यक्ति को सहयोग करेंगे। जानकारी नही होने के कारण लोग तर्क वितर्क करने लगते है और आपस मे उलझ जाते है जिससे की परेशानी का सामना करना परता है।
खास तरह को लोगो को खास तरह से परेशानी होती है जरुरी नही की ऊपर की सभी बातें एक ही व्यक्ति मे मिले। ये तो उस व्यक्ति की संवेदनशीलता पर निर्भर करता है कि वह कैसे किस तरह के ध्वनी से चिड़चिड़ापन महसुस करता है। जानकारी मिलने के बाद इस तरह की समस्या का समाधान निकाल जाता है। खर्राटे भरने वाले के बगल मे सो रहे व्यक्ति की निंद खुल सकती है और उसको परेशानी हो सकती है जवकि दुसरे व्यक्त जो उसके बगल मे है उसके कोई खास प्रभाव नही परता है। इस तरह की परेशानी को व्यक्ति यदी पहले से जानकारी रखता है तो उसके वगल वाले सतर्क रहते है और उनकी रात अच्छी से कटती है। इसलिए आज का दिन जागरुकता के साथ सहयोग के लिए समर्पित है जिससे की समाजिक सौहार्द बना रहे और जीवन उत्कर्ष का भाव बना रहे।
लेखक एवं प्रेषकः डॉ अमर नाथ साहु
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