World Brain Tumer day
विश्व मस्तिष्क ट्यूमर दिवस
विश्व मे बढ़ती ट्यूमर के मरीज में मतिष्क मे ट्यूमर की शिकायत को बहुत जोखिम भरा माना जाता है। पहले तो इसकी पहचान समय से नही होती है क्योकि इसके विकाश की वारीकियो के कारण समय से रोगी डॉक्टर के पास नही पहुँच पाते है। इसके कोई स्पष्ट संकेत नही होते है। समान्य जांच मे इसकी पहचान भी नही होती है। कोई विशेष समझ वाले डॉक्टर ही इसको पता लगा सकते है।
यदि इसको समय से पता लगा लिया जाय तो इसका ईलाज संभव हो जाता है। लेकिन यदि देर हो जाती है तो रोगी की जान भी जा सकती है। इसके प्रति जागरुकता पैदा करने और शोध के विषय की ओर ध्यान आकर्षण करने के उदेश्य से इसको मनाया जा रहा है। इसके इलाज को और आसान बनाने के लिए किये जा रहे प्रयास को गति देने के लिए ये दिन विशेष महत्व का है।
मस्तिष्क ट्युमर की शिकायत मे तेजसर दर्द, दैरा, सोचने और समझने मे परेशानी, दृष्टी समस्या, उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्या देखने को मिलती है। इसके जांच के लिए एमआरआई, सीटीएसकैन और वायोप्सी जैसी व्यवस्था का सहारा लिया जाता है। इसके उपचार के लिए रेडियेसन थेरेपी और सर्जरी जैसे उपाय अपनाये जाते है।
ट्युमर के विकास के शुरुआती समय मे समान्य कोशीका मे अचानक विभाजन शुरु हो जाता है। इसके लिए जिम्मेदार होती है उत्तप्रेरक को लगातार शरीर मे विभिन्न माध्यम से प्रवेश करता रहता है। इसकी मात्रा वहुत ही कम होती है जिसको पता लगाना मुश्किल कार्य है हलांकि इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे है। ट्युमर मे एक वेनाइन केटेगारी की होती है जो मसतिष्क के किसी भाग मे बढ़ता है लेकिन इसके बद्धी की प्रक्रिया धिरे होती है। यह जिस स्थान पर होता है उसी स्थान पर अवस्थित रहता है। यदि इसके बृद्धी के से किसी खास तरह के नस या नर्भ प्रभावित होती है तो उससे संबंधित विमारी की परेशानी दिखाई परती है।
ट्यूमर मे दुसरी कैटेगोरी होती है कैंसर की जो एक स्थान पर तेजी से बृद्धी करती है और दुसरे स्थान पर फैलने मे समक्ष होती है। इस तरह की समस्या के लिए सर्जरी या फिर रेडियेशन थैरेपी का उपयोग करना उपयुक्त माना जाता है। लेकिन मसतिष्क को कोशीका बड़ी ही सेवदनशील होती है। इस प्रक्रिया मे दुसरे कोशीका के प्रभाव मे आने से गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए बहुत ही सोच समझकर कार्य करना होता है। यदि ये ट्युमर सुरुआती दौर मे पता चल जाता है तो इसका इलाज संभव हो जाता है लिकिन यदि देर हो जाती है तो ये लाईलाज हो जाता है।
कभ- कभी देखा गया है कि दुसरे प्रकार् की मसतिष्क के विमारी के इलाज मे इसका पता चल जाता है ओर फिर इसके इलाज से रोगी ठीक भी हो जाता है। ऐसा ही एक रोगी से हमारी बातचीत हुई तो पता चला की उसकी उम्र अभी 25 साल है। उसको मोटरसाईकल से एक्सीडेन्ट हो गया तो एमआरआई करवायी गयी तो पता चला की उसके दिमाग मे पहले से ट्युमर का विकाश हो रहा है, और सरदर्द की परेशानी उसको लगातार रहती थी तो वो समान्य दवा लेकर इस तरह की परेशानी को दुर कर लेता था। इस तरह की परेशानी ओर उसका कभी ध्यान ही नही गया। इलाज करनेवाले डॉक्टर ने इसे एक अच्छा संयोग बतलाया जिसमे उसकी परेशानी दुर हो गई।
एक और रोगी जिसके सर के उपर लाठी के प्रहार मे सर चोटील हो गया। हलांकि इलाज के बाद उसके परेशानी दुर हो गई। लेकिन कुछ साल बाद उसको सरदर्द की शिकायत रहती थी तो उसके मस्तिष्क का एमआरआई करवाया गया तो पता चला की उसके मस्तिष्क मे ट्युमर का विकाश हो रहा है। हलांकि काफी देर हो गयी थी। सर्जरी की प्रक्रिया से गुजरने के बाद कुछ दिन तक रोगी जिंदा रहा लेकिन फिर उसका देहान्त हो गया।
पुरी प्रक्रिया को समझते हुए यदि कोई सरदर्द या उल्टी की सिकायत दुर नही होती है तो इसके लिए उच्च स्तरीय जांच की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए और विमारी को दुर करने की सफल कोशीश होनी चाहिए। कहा जाता है कि जागरुकता ही सवसे बड़ी उपचार है क्योकि समय से विमारी का पता चलने पर रोग को ठीक होनी की पुरी संभावना रहती है।
इस तरह की विमारी मे यदि कोई पुराना चोट हो तो उसकी वाहरी प्रक्रिया सही रहती है लेकिन आंतरिक बदलाव को काफी समय लगता है और फिर यह नयी परेशानी करता खड़ा कर देता है। इसके लिए समय रहते इस तरह की विमारी के प्रति सावधान रहने की जरुरत है, साथ ही इसके ईलाज के लिए ततपरता भी जरुरी है।
होमियोपैथी मे भी ट्यूमर के कारगर ईलाज है। सफल ईलाज मे समय थोड़ा लगता है लेकिन इलाज मे रोगी पुरी तरह से ठीक हो जाता है। इसके लिए जरुरी है कि रोग की शुरुआती अवस्था मे इसकी जानकारी हो जाय। क्योकी रोग की जटीलता होने पर इलाज लम्बा और जोखीम भरा हो जाता है।
हम मस्तिष्क ट्युमर दिवस पर जन जागरण की अपेक्षा ऱखते है और आशा करते है कि सभी लोग इसके प्रति अपनी जागरुकता रखेगें और समय से इसके ईलाज के लिए तैयार रहेगे जिससे रोगी की जीवन प्रत्यासा को बढ़ाया जा सके।
लेखक एवं प्रेषकः- डॉ अमर नाथ साहु
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