विश्व ह्रदय दिवस
विश्व ह्रदय दिवस (World heart day)
बदलती जीवन शैली के बीच लोग तेजी से खुद को बदल रहे है। इस बदलाव के दौर मे लोग खुद को अकेला पाने लगे है। कृतिमता ने जीवन को अपने आगोश मे ले लिया है। हर जगह वही बस्तू है जिसके कुछ अर्थ निकाले गये है। जिसका भी अर्थ निकाला गया है वह एक कृतिम व्यवस्था के अधिन है। इस व्यवस्था का दुसरा पहलू है तनाव। व्यक्ति को सबकुछ होते हुए भी शांती नही है। वह अपनी खुशी इसी मशीनी जीवन मे खोजता है जिसे वह खाली पाता है।
ह्रदय संबंधि बीमारी के लिए लोग खुद को जिम्मेदार मान भी रहे है और जीये भी जा रहे है। सवाल है कि दुसरा क्या पहलू है। जो दुसरा पहलू है वह लोग बहुत कम अपनाते है। लोगो को कचाचैध भरी जीन्दगी पसंद है पर यह संपुर्ण जीवन को परिभाषित नही करती है। इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे है। इसी प्रयास मे जीवन उलझकर सिमट गया है। कुछ पाने की चाहत कभी खत्म ही नही होती है। जीतना मिलता है उतना कम मालूम होता जाता है। इसी से तनाव का स्तर लागातार बढ़ता जा रहा है।
तनाव भरी जीन्दगी मे ह्रदय पर दवाव बनने लगता है। दिमाग जहां पर ज्यादा कार्य करता है वही पर इसको रक्त पहुँचाने वाली ह्रदय को ज्यादा कार्य करना परता है। उधर खान-पान की अनियमितता और बेसुरे तरीके ने खेल को और विगार दिया है। जिसके कारण कोरोनरी आर्टरी मे ब्लोकेज आने शुरु हो गये है। धीरे-धीरे ब्लड संरकुलेशने कम होता जा रहा है। और परेशानी बढने लगी है। तनाव और बड़ा होता जाता है। जिसके कारण परेशानी का स्तर अपने चरण पर पहुँच जाता है जिसका कोई सही सटीक समाधान निकालना मुश्किल होता है।
कार्य की बढ़ती दवाव के बाबजुद लोग जल्दी कोई समाधान चाहता है जिससे उसके समस्या एक नयी स्थिती मे पहुँच जाती है। शांति भरी जीवन पाने के लिए कहा जाने लगा है कि अपने इच्छा को सिमित रखो जिससे की जीवन मे शांति को पा सके। यही पर समस्या आती है कि किसे जोड़े और किसे छोड़े। हम जो देखते है वही से हमारी मह्त्वाकांक्षा भी बनने लगती है और यही महात्वाकांक्षा हमारी परेशानी का कारण भी बनती है।
विश्व ह्रदय दिवस इसी भावावेश को कम करने और जीवन को एक नये अंदाज मे जीन के लिए प्रेरित करता है। हमे यह सिखाता है कि जीवन के हर पहलू को अपने सिधांत और आदर्श के साथ जीना सिखो। तुम्हारे लिए क्या महत्वपुर्ण है इसको समझने की शक्ती पैदा करो तुम देखोगे की तुम खुशहाल होते जा रहे हो। तुम्हारी यही सोच तुम्हे दुसरे से अलग कर देती है।
विश्व ह्रदय दिवस से विश्व मे बढ़ती ह्रदय की समस्या के प्रती प्रत्येक नागरिक को सतर्क करता है, और आने वाले पिढ़ी को यह शिक्षा देता है कि जीवन को समझो तव जीवन की शुरुआत करो। भटकाव को जीवन जीना नही कहते है। जीवन को एक आदर्श के सहारे जीओ और कुछ हासील करो जीसे तुम अपना जीवन उत्कर्ष को पा सको। तुम्हारा कल्याण होगा और तुम्हे शांती जरुर मिलेगी।
ह्रदय के गति को नियमित रखे, व्ययाम करे, मन को शांत रखे। सही भोजन सही समय पर करे। अपने चिंतन को एक अच्छी व्यवस्था का हिस्सा बनावे। सबकुछ पाने की चाहत मे ना उलझे जिससे की आपका लक्ष्य विगर ना जाय। जीवन तो अनवरत चलता है। शरीर बदलते है और यह क्रम चलता रहता है। हर विधा को हर बार अजमाने की कला को धारण करते हुए आगे बढ़ता जाता है। जीवन मुल्यो को समझाता 29 सितम्बर के दिन को खास इसी के लिए बनाया गया है।
हर नागरिक का कर्तव्य है कि जीवन को अच्छी व्यवस्था के साथ जीने के लिए सतत प्रयासरत रहे और हमेशा आगे बढ़ते रहे। स्वस्थ्य रहे अपने दिल को अच्छी व्यवस्था मे रखे ओ आपकी अच्छी विचार के संपादन मे अहम भूमका निभायेगा।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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