राष्ट्रीय कॉफी दिवस
राष्ट्रीय कॉफी दिवस (National Coffee Day)
शरीर के कार्य उर्जा को जागृत करने के लिए ततकालिक कुछ शरीरिक उत्तेजक बस्तू लेने की आवश्यकता महसुस होती है। जिसके कारण ततकालिक तौर पर शरीर की कार्य उर्जा जागृत हो जाय जिसके कारण मनोभाव को नाकारात्मक विचार को सकारात्मक विचार से प्रतिस्थापन करन मे मदद मिले। इसके लिए कई तरह के पदार्थ उपब्ध है। इसमे कॉफी भी आता है। कॉफी मे कैफिन उत्तप्रेरक पाया जाता है जो हमारे रक्त के संचार को कुछ समय के लिए बढ़ा देता है। इसके कारण हमारे शरीर मे रक्त का दौरा बढ़ जाता है। जिससे हमारे शरीर मे ऑक्सीजन की स्तर उच्च हो जाती है। जिससे हमारे शरीर के उपापचय की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
हमारा शरीर सोचने मे ज्याद थकता है क्योकि मश्तिष्क को सबसे ज्याद उर्जा की जरुरत होती है। यदी हम किसी प्रकार के व्यवधान से गुजर रहे होते है या फिर हमारी कार्य हमारे कार्य क्षमता से ज्यादा मुश्किल होता है तो सोच की प्रक्रिया तेज हो जाती है। जिसके कारण हमे थकावट आती है। थकावट आने से विचार की दिशा बदल जाती है। इस बदली दिशा को बनाने के लिए कुछ उपाय करने होते है जिसमे ऑक्सीजन की मात्रा शरीर मे बढ़ाना होता है। इसमे कॉफी का स्थान भी महत्वपुर्ण है। कॉफी एक उत्तप्रेरक का कार्य करता है। जिसके कारण कुछ समय के लिए मुड फ्रेश हो जाता है। जिसके बाद व्यक्ति फिर से कार्य के लिए उत्सुक हो जाता है।
कार्य करने के लिए जो व्यवस्था हम अपने शरीर को देते है। हमारा शरीर उसी के अनुकूलित हो जाता है और वह जब भी इस तरह की समस्या आती है इसकी मांग करता है। धिरे-धिरे व्यक्ति इस वस्तु की आदी हो जाता है। आदत के कारण हमारे शरीर मे एक खास तरह के रसायण की मात्रा बढ़ने लगती है। जिसका नियंत्रण हमारे मश्तिष्क से होता है। इस आदत के कारण कुछ समस्या भी बनने लगती है। इसको दुर करने के लिए इस तरह के पादार्थ को लगातार नही लेना चाहिए।
कॉफी की भी आदत लगती है जिसके कारण कॉफी यदी समय पर नही मिले तो सर दर्द हो जाता है। इसको रोकने के लिए हमे इस तरह के मनोभाव को काफी जरुरत परने पर ही लेना चाहिए। इस तरह के दुसरे विकल्प पर भी विचार करने की जरुरत है। जैसे की गहरी लम्बी सांस लेना जिससे की ऑक्सीजन की मात्रा हमारे शरीर मे बढ़ जाय।
कॉफी दिवस इसी तरह के विचार से समाज को जागरुरक करने के लिए बनाया गया है। हर बस्तु के अपने फायदे और नुकसान है। इसी को ध्यान मे रखकर हमे कार्य को करने की जरुरत है जिससे की हमारा हमेशा कल्याण का मार्ग बना रहे। हमारी जागरुरकता ही हमे सबल और साहसी बनता है जिससे हमारी खुशी गुणित होते रहती है। हमारे मनोभाव को सही करने के ये गुड़ सिखाता 29 सितम्बर का दिन खास है। इसको हमारे अपनो के साथ साझा करने की जरुरत है जिससे की समाज के साथ हमारा भी कल्याण हो सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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