विश्व रेबीज दिवस
विश्व रेबीज दिवस World Rabies day
यह बीमारी कुत्ते, विल्ली, बंदर या अन्य गर्म रक्त बाले के काटने से होता है। आम तौर पर घरेलू जानवर के रुप मे कुत्ते ज्यादा प्रभावित करते है। कुत्ते को काटने से होने वाले बीमारी रेबीज नामक बाईरस से होता है। जिसको लाइसिसी बाईरस कहा जाता है। इसमे रोगी पानी से डरने लगता है। पानी चलने की आवाज से भी डरने लगता है। कुछ दिन तक जीवित रहने के बाद उस रोगी की मत्यू हो जाती है। इस घातक बीमारी से निपटने के लिए संक्रमित कुत्ते को मार देने की सलाह दी जाती है जिससे की किसी दुसरे को प्रभावित ना हो। यदि संक्रमित कुत्ते काट ले तो इसकी इलाज तुरंत करानी चाहिए।
संक्रमित कुत्ते का दिमाग स्पंज की तरह हो जाता है। उसकी स्थिती पागल की भाती हो जाती है। संक्रमित कुत्ता भागता जाता है और रास्ते मे मिलने वाले के काटते जाता है। इस प्रक्रिया मे बहुत सारे व्यक्ति बीमार हो सकते है। कुत्ता मे पालतू कुत्ता और जो पालतू नही होते है दोनो आते है। पालतू कुत्ते को रेबीज के बैक्सीन लगाने की सलाह दी जाती है जिससे की इसके संक्रमण होने पर कुत्ता इस बीमारी से रोग ग्रस्त नही होता है। जिसके कारण व्यक्ति प्रभावित नही होता है।
जो कुत्ते पालतु नही होते है। उससे साबधान रहने की जरुरत होती है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कुत्ते संक्रमित तो होते है लेकिन उसकी बीमारी अभी समान्य स्थिती मे रहती है फिर भी काटने वाले व्यक्ति को बह प्रभावित कर सकता है। कुत्ते काटने वाला व्यक्ति कुत्ते की तरह आवाज करता है। इस बीमारी की सही जानकारी और जागरुकता जरुरी है जिससे की इस तरह के बीमारी से निपटा जा सके और समय के साथ उपचार के उपाय भी लिया जा सके।
संक्रमण के प्रारंभिक लक्षण मे जलन या खुजली,बुखार, सिरदर्द और कमजोरी होती है। अध्यधिक बेचैनी, मतिभ्रम और हाइड्रोफोबिया होती है। एक बार बीमारी सक्रिय होने के बाद ये पुरी तरह से घातक हो जाती है। संक्रमित कुत्ते के काटने के बाद साफ पानी और साबुन से 15 मिनट तक धोये। जागरुकता ही सही इलाज है। इस लिए 28 सितम्बर के दिन को खास तौर पर बनाया गया है जिससे की इस बीमारी के बारे सभी को जानकारी हो जिससे की इस बीमारी के फैलाव को रोका जा सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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