विश्व डिस्लेक्सिया दिवस

विश्व डिस्लेक्सिया दिवस (World Dyslexia Day)
यह एक न्यूरोलोजिकल स्थिती या बिकार है जिसके कारण व्यक्ति को पढ़ने लिखने और शब्दो का सही उच्चारण करने मे कठीनाई होती है। इस प्रक्रिया मे मस्तिष्क अगल तरह से भाषा और शब्दो को प्रोसेस यानी दिमाग को संदेश भेजता है। इसके कारण समझने का तरीका अलग होता है। इस तरीके को समझकर यदि इसको वास्तविकता से अवगत कराया जाय तो समान्य जैसे व्यवहार करने दिखते है।
शब्दों या अक्षरों को पहचानने मे कठीनाई का होना जैसे b को d पढ़ना और Saw को Was पढ़ना। बहुत धिरे-धिरे पढ़ना या रुक-रुक कर पढना सामिल है। लिखते समय अक्षरों का क्रम बदल देना या छोड़ देना। कबितायें, नाम, नंबर को याद रखने मे मुश्किल होना। बांये और दाये में अंतर समझने मे दिक्कत होना।
यह एक जन्मजात बीमारी है। इसमे मस्तिष्क थोड़े अलग तरह से कार्य करता है। इस तरह के बच्चो समान्य से कुछ अलग ब्यवहार करते है। हलांकी इसको अभ्यास कराने से इनकी बस्तु की परख कराने से ये सिख जाते है। इसको सिखने की प्रक्रिया को थोड़ा विस्तार करना परता है जिससे की इसके दिमाग अपने तरीके से विषय को समझ सके और उसका प्रतिउत्तर दे सके।
समान्य से अलग व्यवहार वाले बच्चो को कई तरह की परेशानीयां का सामना करना परता है। इस परेशानी को समझ रखने वाले के लिए ये कोई परेशानी नही होती है क्योकी वो उसके अनुरुप विषय को व्यवस्थित कर देते है जिससे उसके बात समझ मे आ जाती है। जबकि समान्य व्यवहार उन्हे सबसे अलग कर देता है।
बच्चों मे इस तरह के लक्षण दिखते ही परिवार वालों को सावधान रहने की जरुरत है जिससे बच्चा हीन भावना का शिकार ना हो और उसकी शिक्षा दिक्षा सही तरह से हो। बच्चो का विश्वास बना रहना चाहिए। समान्य जागरुकता का दे दिन जगजागरण के लिए है जिससे की इस तरह के बच्चो को न्याय मिल सके और कार्य सुचारु रुप से चलता रहे। इस जागरुकता के लिए इस तरह के बच्चो को मदद करनी चाहिए।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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