अंतर्राष्ट्रीय एलर्जी दिवस
अंतर्राष्ट्रीय एलर्जी दिवस
एलर्जी को आजकल बहुत बड़ी बिमारी के रुप में देखा जा रहा है। इसका कारण आंतरिक प्रतोरोधक क्षमता को ज्यादा संबेदनशील होना माना जाता है। इसके लिए कई तरह के कारक दिम्मेदार माने जाते है। इसके लिए बिमार व्यक्ति को ज्यादा सावधान रहने की जरुरत है जिससे की उनका मानसिक और भौतिक जीवन स्थिर रहो। इसके साथ ही संयम और नियंत्रित जीवन को उच्च स्तर पर जीने के अभ्यास बनाने की भी जरुरत है।
एलर्जी की सिकायत सभी लोगो मे एक जैसी नही होती है। यह व्यक्ति दर व्यक्ति अलग होता है इसके लिए भी व्यक्ति को व्यक्तिगत स्तर पर सावधान रहने की जरुरत है। समय के साथ होने वाले परिवर्तन के प्रति सतर्क रहे। जिस पदार्थ से एलर्जी है उसका सेवन नही करे इसे उसके दुषप्रभाव से बचा जा सकता है। यदी जरुरत हो तो इसका उपयोग भी सावधानी से किया जाय। इस कार्य के लिए स्वयं को संयमित करने की जरुरत है। स्वयं के प्रति जागृत रहने वाले लोग इस तरह के परेशानी से बचते है और लम्बे समय तक स्वयं को स्वस्थ्य रखते है।
दवा के अत्यधिक उपयोग से बचने के लिए शरीर के हर छोटी-बड़ी बातों का पुरा ख्याल रखने की जरुरत है जिससे की समय के साथ विसंगति को दुर किया जा सके और सुरक्षित जीवन को सुनिश्चित किया जा सके। स्वयं से यदि संभव नही हो तो इसके लिए डॉ की सलाह लेनी चाहिए जिससे की भविश्य मे होने वाली गंभीर संमस्या से बचा जा सके। मानव मन बड़ा ही चंचल होता है उसके पसंद नापसंद का दायरा बड़ा ही भिन्न होता है इसके कारण वह अपने उपयोग के लिए जरुरी बस्तू का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे की उसकी समस्या का दायरा भी बढ़ रहा है। इसके लिए विशेषज्ञ की सलाह की जरुरत है जिससे की किसी भी तरह के गलत प्रयोग से बचा जा सके। देखा-देखी कार्य को करने की आदत मे सुधार करने की जरुरत है। जरुरत हो तो दवा का भी प्रयोग करना चाहिए जिससे की सुधार की प्रक्रिया समय के साथ सुचारु रुप से जारी रहे और स्वास्थ्य लाभ मिलता रहे।
08 जुलाई का दिन एलर्जी पर बिशेष जानकारी रखने तथा लोगो मे जाकरुता फैलाने के लिए रखा गया है जिससे की लोगो को इसके दुशपरिणाम से बचाया जा सके। एक स्वास्थ्य मन के लिए एक स्व्स्थ्य शरीर की जरुरत है जो एक उच्च संकल्प शक्ति के साथ कार्य को करते रहने से ही मिल सकती है। हम आशा करते है कि लोग आज के संदेश के हर जरुरत मंद तक पहुँचायेंगे जिससे की लोगो को इसके दुशपरिणाम का सामना करना नही परे। जय हिन्द
लेखक एवं प्रेषकः डॉ अमर नाथ साहु
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