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विश्व सेरेब्रल पाल्सी

विश्व सेरेब्रल पाल्सी दिवस

सरेब्रल भाग हमारे मस्तिष्क के सबसे उपरी भाग है। इसमे कुंडलित नुमा संरचना होती है जिसे सल्कस और गाईरस कहते है जो शरीर के बिभिन्न भागो के जानकारी को सुरक्षित रखती है और इसका उपयोग शरीर के नियंत्रण के लिए करती है। इस भाग मे ग़ड़बरी होने का मतलब है बहुत बड़ी समस्या का सामना करना। शरीर के मांसपेशियों के सहारे शरीर के बिभिन्न गतिवीधी को नियंत्रित कि जाती है। इस भाग मे होने वाली परेशानी को दुर करना आसान नही होता है क्योकि इस भाग मे तंत्रिका तंत्र का जाल से बिछा रहृता है और यह भाग बहुत संबेदी भी होता है। इस परिस्थिती मे व्यहारीक तैर पर व्यक्ति कुछ नही कर सकता है क्योकि उसका नियंत्रण प्रणाली ही कमजोर हो गई होती है।

इस तरह की परेशानी होने के कई कारण होते है। कुछ परेशानी जन्म के समय तथा कुछ परेशानी बाद मे भी होती है। जन्म के समय होने वाले परेशानी से सरेब्रम को आधात पहुचता है। जन्म के समय बच्चे का देर से रोना जिससे की ऑक्सीजन पहँचने की प्रक्रिया मे देर हो जाती है जिससे सेरेब्रम वाले भाग की कार्य प्रणाली अरुद्ध हो जाती है। बच्चो को गर्भावस्था या बाद मे भी गंभीर संक्रमण का होना। इस संक्रमण के कारण इस भाग मे परेशानी का सामना करना परता है। जन्म के समय,जन्म के दौराण या शैशवावस्था मे मस्तिष्क मे चोट लगना या रक्तश्राव का होने से भी बड़ी परेशानी हो सकती है। समय से पहले जन्म या जन्म के समय कम बजन का होना। सेरेव्र्ल पाल्सी की समस्या को पैदा कर सकता है।

इस तरह की शिकायत मिलने के बाद बच्चो के विकास मे देरी हो जाती है। जैसे गर्दन को नही संभाल पाना बैठना, चलना समय से नही सिख पाना सामिल है। शरीर मे होने वाली हरकतों पर नियंशत्रण का नही रख पाना या फिर अनचाहे गतिविधी को करना सामिल है। देखने , सुनने बोलने या निगलने मे कठीनाई का समना करना। सेरब्रल पाल्सी की इस समस्या को रोकने के लिए इस तरह की कठीनाईयो का ध्यान रखना होगा।

बड़े लोगो मे आमतर पर मांस पेशियां मे अकड़न देखने को मिलती है। शरीर की हरकतो पर नियत्रण नही रख पातें है। शरीर का संतुलन भी नही बन पाता है। पाल्सी का मतलब होता है कि संबंधित भाग का सही से कार्य नही कर पाना। इसमे शिथिलता का आ जाना।

बच्चो मे होने वाली इस तरह की समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। यदि समय से सभी पहलूऔं का ध्यान रखा जाय तो वच्चो मे होने वाली परेशानी को सही किया जा सकता है जिससे की बच्चे के सुखद भविश्य की कामना की जा सके। बच्चो की सही देखभाल नहींं होने से होने वाली पेरेशानी को कम करने के उदेश्य से ही इस विषय को समाज के जनजागरण के लिए बनाया गया है।

समान्य गलती से होने वाली परेशानी को कम करके बड़े परेशानी को रोका जा सकता है। बिना जानकारी के कारण लोग ये समझते है कि ये प्राकृतिक प्रकोप है। जबकि जानकारी होने के बाद इस तरह की समस्या का निदान निकाला जा सकता है। जिससे की बच्चो की समान्य गतिविधी को सही किया जा सके।

लक्षण के हिसाब से बच्चो को इलाज कराने की जरुरत है इसमे खास करके बच्चो को अभ्यास कराने की जरुरत हती है जिससे की उसके अंग का समान्य विकाश की प्रक्रिया को सही से किया जा सके।

लेखक एवं प्रेषक आमर नाथ साहु

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