विश्व गर्भनिरोधक दिवस
विश्व गर्भनिरोधक दिवस (World Contraception Day)
वर्तमान समय मे मानव सुख की खोज मे भटक रहा है। जो आध्यात्मिक जीवन जीते है उनके लिए सुख के साधन की गहराई अधिक होती है। उनका सम्पुर्ण जीवन इसी साधना मे वितता है कि सुख की गहराई को और अधिक कैसे किया जाय जिससे समाज को एक सुखद संदेश मिलता है। दुसरी तरफ वो लोग है जो सुख की खोज बाहर करते है। सुख की बाहर खोजने वाले भौतिक जीवन की अनेक वस्तुओं के तरफ खिचते हुए अंत मे आंतरिक संवेदना के तरफ खिचे चले जाते है। यह आंतरिक संवेदना उसके काम बासना को भड़का देता है जिससे उसके काम की शक्ति बढ़ जाती है।
काम बासना की बढ़ी हुई शक्ति विपरित लिंग के प्रति आकर्षन को बढ़ा देते है जिससे समागम करने की गतिविधी बढ जाती है। काम बासना की शक्ति को सिर्फ जनसंख्या बढ़ाने के लिए ही निर्मित किया गया है। जवकि यहां बात सिर्फ सुख की अनुभूति तक सिमित रह जाता है। जानवर मे प्राकृतिक रुप से जनसंख्या नियंत्रण होता है जिससे उसके बच्चे पैदा करने की गतिविधि जीवन प्रयंत स्वभाविक रुप से चलती है जवकी मानव की संवेदना शक्ति गहरी होने के चलते उनसे अपने लिए अनेक तरह के क्रिया कलाप बना लिया है जिससे जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है जिसका नियत्रण करना जरुरी है। इसके साथ ही कामबासना भी लगातार चलने की आकांक्षा भी पुरी होने चाहिए।
गर्भनिरोधक व्यवस्था यही काम आती है। जनसंख्या नियंत्रण से व्यक्ति को अपने सामर्थ के हिसाव से जीवन को नियंत्रण करने के गुर मिल जाते है जिससे की उसका जीवन संयमित और सुरक्षित रहता है। गर्भनिरोधक के कई साधन उपलब्ध है। इसके समझने की जरुरत है। अपने हिसाव से इसका प्रयोग करने की जरुरत है। गर्भनिरोधक के रुप मे स्त्री और पुरुष दोने के लिए साधन उपलब्ध है। स्त्री के लिए जहां पर कंडोम, खाने वाले पिल्स, कॉपर टी आदि प्रयोग मे आते है। वहीं पर पुरुष के लिए कंडोम के अलावा भेसेक्टोमी होता है जिससे की स्पर्म को नियंत्रित किया जाता है। वही महिला मे ट्यूबेकटोमी आती है जिससे की उसके प्रजनन करने की क्रिया बाधित हो जाती है।
उपरोक्त व्यवस्था मे कुछ हानी तो कुछ फायदे है। इसके बारे मे विस्तृत जानाकारी पाने के बाद ही इसका प्रयोग करने की जरुरत है। इसके अलावा आजकल आउसाईड डिसजार्य भी अपनाया जा रहा है। इसके बाद ओभूलेशन टाईमिंग कंट्रोल भी अपनाया जाता है। लेकिन इस तरह की क्रिया को करने के लिए काफी सतर्कता की जरुरत होती है। गर्भनिरोधक प्रक्रिया को अपने के बाद जीवन को अपने तरह से नियंत्रण करने मे सहायता मिलती है। आजकल के व्यस्त जीवन मे खुद को आगे ले जाने के लिए अपने को नियंत्रित करने की जरुरत है जिससे की व्यक्ति विकास की सर्वोच्य शिखर को पाकर खुद को धन्य कर सके।
विश्व गर्भनिरोधक दिवस व्यक्ति को खास तौर पे जीवन को संयमित और संरक्षित करने के लिए अपनाये जा रहे तैर तरीके समझने के लिए प्रोत्साहित करता है। संयमित जीवन को नियंत्रण के लिए गर्भनिरधक व्यवस्था वहुत ही महत्वपुर्ण है। इसके लिए सबको जागरुक होने की जरुरत है जससे की एक खुशहाल जीवन को आसानी से जीया जा सके। आनावश्यत बच्चो को फौज खड़ा करने की जरुरत नही है जिससे की जीवन सुखमय के जगह पर परेशानी और तनवा ग्रस्त हो जाय।
जीवन को गंभीर चुनौती का सामना करता व्यक्ति इस व्यवस्था को अपना कर एक खुशहाल जीवन जी सकता है। इसके लेए वस एक संकल्प शक्ति की जरुरत है वांकी सब ठीक ठाक रहेगा ऐसा मेरा विश्वास है। 26 सितम्बर को खास करके इसी व्यवस्था के लिए बनाया गया है। जिससे की एक सुखमय जीवन सबको प्राप्त हो।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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