अंतर्राष्ट्रीय रिटेनर दिवस
अंतर्राष्ट्रीय रिटेनर दिवस, ( International Retainer Day)
दांत प्राकृतिक रुप से स्वस्थ्य और सुन्दर होते है। जो मुख की खुबसुरती को बढ़ा देते है साथ ही खाने पीने मे भी मदद करते है। दांत की सही देखभाल के लिए दांत की सफाई जरुरी होती है। पहले समय मे लोग दांत को दातून से धोते थे। जिसके कारण दांत के उपर एक दवाव परता था साथ ही दातून के जैविक रसायण शरीर के प्रभावित भी करते थे। आजकल इसके जगह ब्रश ले लिया है। महगे ब्रश भी आज वो काम नही कर पाते है जो प्राकृतिक रुप से पहले होता था। आजकल बहुत कम लोग है जो दातून का इस्तेमाल करते है।
आजकल रहन सहन कृतिम हो गया है। जिसके कारण लोगो को दातून तक पहुँच कम हो गया है। खान पान मे होने वाले बदलाव से वहुत सारी परेशानी भी होने लगी है। इसी मे एक समस्या दांत के सही तरह से एक पंक्ति मे नही होना होता है। जिसके कारण दांत बाहर से खराब दिखता है। हंसी के समय दांत जब पुरी तरह से दिखता है तो उसकी खुवसुरती अच्छी नही लगती है। इसके लिए डेन्टीस्ट दांत को सीधी करने के लिए रिटेनर का उपयोग करते है जो दांत को सही आकार मे लाने के लिए उपयोग किया जाता है। दांत की खुबसुरती को बनाये रखने मे ये उपयोगी सावित होता है।
जानकारी के आभाव मे लोग इसे छोड़ देते है। जिससे की उसकी परेशानी दुर नही होती है। यदी उनको पुरी जानकारी हो तो वो अपनी दांत की खुवसुरती को बना सकते है। इसके लिए जो सावधानी बरतनी होती है उसकी भी जानकारी उनको हो जाती है। दांत यदी अपने लाईन से हटने लगे तो उसको सही करने के लिए प्रयास शुरु कर देनी चाहिए। दातून से दांत पर जब दवाव परता है तो दांत स्वतः ही सही हो जाता है। यदि दांत विगर गया है तो डॉक्टर का सहयोगो लेना जरुरी हो जाता है।
19 जुलाई के दिन को दांत की खुबसुरती बनाने और खुलकर हंसने की आजादी देता है। अपने भावना के साथ खुशी जाहिर करने की कला को रोकने की जरुरत नही है बस एक जागरुकता आपके लिए सबकुछ सही कर सकता है। लोगो तक ये जानकारी पहुँचे और इसका फायदा सबको हो इससे उसकी खुशी बनी रह्गी।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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