क्रोनिक डिजीज डे
क्रोनिक डिजिज डे (Chronic Disease Day),
क्रोनिक डिजीज यानी पुरानी बीमारियां समान्यतया 3 महीने या उससे उपर के समय तक जब रहती है और उसका ईलाज लगातार किया जाता है साथ मे उसका प्रवंधन से उसके विस्तार को प्रभावित किया जाता है तो इसको पुरानी बीमारी में रखते है। कुछ बीमारीयां तो सालो चलती है तो कुछ बीमारीयां जीवन शैली का हिस्सा बन जाती है। चिकित्सा विज्ञान लगातार प्रगति कर रहा है और नये-नये उपाय खोजे जा रहे है, जिसके बाद ये आशा बनती है कि इस बिमारीयों का सही से ईलाज हो सकेगा। लेकिन जबतक इसका पुर्ण ईलाज नही होता है तबतक इसको अच्छे से प्रवंधन की जरुरत होती है जिससे की इसके बिस्तार को रोका जा सके या इससे होने वाली परेशानी को कम किया जा सके।
पुरानी बीमारीये में मधुमेह, ह्रदय रोग, गठीया, अस्थमा, उच्च रक्त चाप, कैंसर, किडनी रोग आदि को रखा जता है। कुछ बिमारीयां ऐसी है जिसको की जीवनशैली मे सुधार करके बिमारी को रोकथाम किया जा सकता है। समय के साथ बीमारी की जटीलता बढ़ती जाती है और बीमारी से होने वाली परेशानी भी बढ़ने लगती है। यदि बीमारी के बारे मे जानकारी हो तो जीवनशैली मे सुधार करके इसको आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। इसके इलाज को भी जल्दी शुरु करके इसके निदान तक पहुँचा जा सकता है। ऐसा देखा जाता है कि लोगों को पता ही नही होता है की वह बीमार की स्थिती मे चल रहा है जब परेशानी बढ़ती है तो वह ईलाज की प्रक्रिया को शुरु करते है तबतक देर हो जाती है।
कहा जाता है कि जानकारी ही सबसे बड़ा इलाज होता है इसके लिए आज का दिन खास है जिसमें की पुरानी बीमारीयों के बारे मे जानकारी को नवीनता प्रदान की जाती है और उससे बचने के उपाय को प्रमाणिकता के साथ उपयोग मे लाकर लाभ उठाया जाता है। जीवनशैली से तातपर्य खाना-पान, रहन-सहन की प्रक्रीया को समझने की जरुरत से है। हम जिस तरह से अपना समय बीता रहे होते है उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव परता है इसका मुल्यांकन जरुरी होता है इसको ही जीवन शैली मे बदलाव के रुप मे देखा जाता है।
होमीयोपैथिक दवा पुरानी बीमारी में अत्यधिक प्रभावकारी होती है यदि इसको लगातार समय से लिया जाय और उचीत प्रवंधन को सही से उपयोग मे लाया जाय तो जीवन प्रत्यासा बढ़ जाती है। अनुभव से ऐसा देखा गया है कि असाध्य रोग मे भी लोग परेशानी मुक्त होकर जीवन यापन करते है। लोगों मे जाकरुकता के प्रभाव को प्रचारीत करने तथा जीवन को आसान बनाने के लिए 10 जुलाई के दिन को उपयुक्त माना गया है।
लेखक एवं प्रेषकः डॉ अमर नाथ साहु
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