Adarsh Homoeo Clinic.com Festival विश्व मस्तिष्क दिवस

विश्व मस्तिष्क दिवस

| | 0 Comments | 3:22 pm
World Brain Day

मस्तिष्क मानव के विकास की सबसे बड़ी पुजी है। आज इसी के बदौलत समस्त जीवनघारी में मानव सबसे ऊपर है। मस्तिष्क सबंधी विकार की जानकारी होने और इसके इलाज करने के सही समय और सही व्यवस्था को जानने से अधिक सुरक्षित रहा जा सकता है। मस्तिष्क के रोगों मे डिमेंसिया, अलजाईमर, मिर्गी और स्ट्रोक जैसे रोग आते है। इस तरह के बीमारी को रोकने के लिए व्यक्ति को पहले से सतर्कता बरतनी चाहिए जिससे की आनेवाले समय मे परेशानी बहुत हद तक कम हो सके।

बीमारी कि शुरुआत धीरे-धीरे होती है। यदि व्यक्ति जागरुक हो तो इलाज समय से शुरु करते हुए इसपर काबु पाया जा सकता है। यदि ईलाज देर से शुरु होती है तो भी जानकारी के फायदे उठाये जा सकते है। किसी भी समय बीमारी से संबंधी होने वाले परेशानी की समझ होती है तो लोग रोगी के साथ सही से वर्तालाप करते है। उन्हे पता होता है इस तरह के बीमारी मे क्या परेशानी होती है। जानाकारी के अभाव मे लोग कुछ और समझ बैठते है और परेशानी का सामना करना परता है।

खानपान मे होने वाले बदलाव के कारण लोगो को पता ही नही चलता है कि कब वो बीमारी के चपेट मे आ गये जब जानकारी होती है तबतक देर हो जाती है। इसलिए जागरुकता और जानकारी जरुरी है। जिससे की ईलाज समय से हो। स्ट्रोक मे वीपी बढ़ने लगती है। बीपी के बढ़ने का कारण उच्च उर्जा का खाना-खाना और कार्य नही  के बरावर करना यानी कैलोरी की खपत कम होती है। इसी कारण खून मे बसा की मात्रा बढ़ने लगती है और उच्च रक्त चाप का शिकार हो जातें है। इसके बावजुद भी यदि ध्यान नही दिया जाता है तो स्ट्रोक की समस्या आती है। इसके लिए जागरुकता ही सबसे बड़ा उपाय है।

डिमेंसिया भी लगातार रोगी की मानसिक स्थती के बिगरने के कारण होता है। व्यक्ति किसी खास विचार को लेकरके तनाव मे रहता है। उसके तनाव को कोई समुचित हल नही निकलने के कारण उसकी निराशा बढ़ने लगती है। यही निराशा व्यक्ति के डिमेंसिया के तरफ ले जाती है। इसका भी यदि सही समय पर व्यक्ति को समझाया जाय तो वो डिमेंसिया से बच सकता है।

कोई भी बीमारी पुराना होने पर कोशीकीय बदलाव होने लगता है जिसके कारण उसके ठीक होने की संभावना कम होने लगती है। इसलिए जागरुकता को बढावा दिया जा रहा है। जागरुकता के कारण संदेश एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति तक स्थानांतरित होते रहती है। मस्तिष्क में और भी बहुत सारी बीमारी होती है जिसका संबंध संक्रमण से भी होता है उसको भी यदि सही से देखभाल किया जाय तो नियंत्रित किया जा सकता है।

मस्तिष्क के बीमारी की जानकारी लेने, इलाज कराने, अनुशंधान को बढ़ावा देने तथा लोगो को शिक्षित करने के उदेश्य से 22 जुलाई का दिन महत्वपुर्ण है। जगरुकता के लिए चर्चा जरुरी होता है जिसके कारण एक दुसरे तक संदेश पहुँचता है और कार्य अवरोध कम हो जाता है.

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

संबंधित लेख को जरुर पढ़ेः

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

आंतर्राष्ट्रीय एलर्जी दिवस

अंतर्राष्ट्रीय एलर्जी दिवसअंतर्राष्ट्रीय एलर्जी दिवस

अंतर्राष्ट्रीय एलर्जी दिवस एलर्जी को आजकल बहुत बड़ी बिमारी के रुप में देखा जा रहा है। इसका कारण आंतरिक प्रतोरोधक क्षमता को ज्यादा संबेदनशील होना माना जाता है। इसके लिए

ऑटिज्म

ऑटिज्मऑटिज्म

ऑटिज्म इसे ऑटिज्म स्पेट्रम डिसऑर्डर (ASD) कहते है। हालिया हुए अध्ययन से यहा स्पष्ट हुआ है कि इस परेशानी का संबंध अनुवंशिकी गड़बड़ी से है। इसमे तंत्रिका सबंधि गड़बड़ी हो

विश्व पोलियो दिवस

विश्व पोलियो दिवसविश्व पोलियो दिवस

विश्व पोलियो दिवस ( World Polio Day ) पोलियो मुक्त विश्व बनाने हेतु पोलियो के टिकाकरण की शुरुआत 2 अक्टूबर 1995 की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वरा 27