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पंडास जागरुकता दिवस

PANDAS जागरुकता दिवस

इन विकारो से पिड़ित बच्चों में अचानक ओसीडी (OCD), गंभीर चिंता, खान-पान मे अरुची, चिड़चड़ापन और व्यवहारिक परिवर्तन दिखने को मिलता है। इस बीमारी से प्रभावित बच्चों के लिए, रिसर्च, चिकित्सा शिक्षा और समाजिक सहायता बढ़ाना है जिससे की इसको समय पर इलाज मिल सके।

यह बीमारी यौवनावस्था के पहले शुरु होने के कारण अचानक और तेज गति से होने वाले परिवर्तन है जो कई तरह के विकार लेकर आता है। इसमे रात को निंद ना आना, विस्तर पर पेशाव का होना, जोड़ो मे दर्द होना, चिंता तथा मूड का बदलना सामिल है। हाल के शोध से पता चला है कि स्ट्रेप्टोकोकस पाईरोजेन्स के द्वारा स्कारलेट फीवर या गले के संक्रमण जैसे बीमारी होने की बजह से इस तरह के शिकायत देखने को मिलता है।

शरीर के द्वार इस बैक्टेरिया को मारने के लिए एण्टीबॉडी का निर्माण किया जाता है जो संभवतः शरीर  के स्वस्थ्य कोशीका को ही हानी पहुँचाने लगता है। जानकारी के हिसाव से मस्तिष्क के वेसन गंग्लिया को प्रभावित करता है क्योकि इसमे प्रोटीन की संरचना एक जैसी होती है। इसकी जांच के लिए खुन की जांच करना और गला से स्वेव लेकर जांच करने की प्रक्रिया अपनायी जाती है।

शुरुआत मे बैक्टेरिया को मारने के लिए दवा दी जाती है और लक्षण के हिसाव से इलाज किया जाता है। शरीर मे हो रहे बदलाव के अनुसार इसको व्यवहारीक रुप से भी सहायता किया जाता है जिससे की इसकी आंतरिक मजबुती हो सके। ज्यादा जरुरी परने पर इम्यून की दवा भी दी जाती है।

इस तरह के खास बीमारी के लिए रोगी की मनोदशा के साथ साकारात्मक व्यवहार करने की जरुरत है क्योकि शुरुआती संक्रमण से ही देखभाल जरुरी होता है। आंतरिक सुरक्षा प्रणाली ज्यादा प्रभावित ना हो इसके लिए पैष्टीक भोजन देने की जरुरत है। बीमारी के सामने आते ही इलाज की सही प्रक्रिया को शुरु करके बीमारी की जड़ तक पहुँचा जा सकता है।

9 अक्टूबर के खास दिन को इसी विषय पर जागरुकता देने के लिए बनाया गया है जिससे की लोगो को इसके प्रति पहले से सतर्क रहे और इलाज समय से हो तथा लाभ ज्यादा मिले साथ ही सहानुभूति भी बनी रहे जिससे साकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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