विश्व हॉस्पिस और पैलिएटिव केयर दिवस
विश्व हॉस्पिस और पैलिएटिव केयर दिवस (World Hospice and Palliative Care Day)
जीवन के बिभिन्न पहलूओ का गहराई से अध्ययन करता हुआ मानव आज अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग और सतर्क रहते हुए भी जीवन को जीत नही पाया है। उसकी यही मानसिकता उसे लगातार परेशान करती रहती है। मानव सुख के सारे आयाम को पाना चाहता है। वह इसके लिए हमेशा प्रयासरत रहता है। जहां भी उसे स्वास्थ्य के बारे मे कोई नवीन जानकारी पता चलता उससे वह जुड़कर स्वयं को नवीन बना लेता है। इसके बाबजूद भी कुछ ऐसी परेशानीयां है जिससे वह खुद को अलग नही कर पाता है और बीमारी की एक श्रंखला मे उलझकर कर रह जाता है। यह उलझन उसे इसके साथ जीना सिखा देती है।
मह्त्वाकांक्षी व्यक्ति स्वयं को एक सीमा मे बांधकर जीता चला जाता है। उसको ही वह संम्पूर्ण जीवन मान लेता है। जबकि जीवन के सम्पुर्णता इस बात मे है कि हम अपनी आंतरिक शक्ति को जाने और उसके अनुरुप आचरण करें। कार्य को करते हुए स्वयं को कार्य के निमित मानकर चलने से कार्य का दवाव नही परता और व्यक्ति तनाव से मुक्त रहता है। अधिक तनाव झेलने वाला व्यक्ति समय के साथ खिंन्न रहने लगता है। जिसके कारण उसका स्वभाव चिड़चिड़ा बन जाता है। इसके इसी स्वभाव के कारण उसके शरीर के आंतरिक प्रक्रिया बदलने लगती है। इसको वह बीमारी नही मानता है और जीते चला जाता है।
बीमारी की भूमिका बना रहा मानव खुद के लिए संयम और व्यवस्थित रहते हुए भी वह बीमार का सिकार होता चला जाता है। पुरी निंद लेना, कार्य को त्वरित गति से करना, भोजन को सिमित मात्रा मे लेना, व्ययाम करना, कार्य उत्साह बनाये रखना जैसी आदते बनाना जरुरी होता है। जिससे की उसका वर्तमान खुशहाल हो सके। ऐसा नही होने पर व्यक्ति किसी आसाध्य रोग का शिकार हो जाता है। यह रोग समय के साथ परिवर्तित होते हुए एक गंभीर बीमारी मे बदल जाता है। जहां से बापस लौटना कठीन होता है।
ये वो समय होता है जब डॉक्टर को पैटियेटिव मेडिसिन चलाना होता है और रोगी को कहा जाता है कि वह अपनो के साथ खुश रहे उसके कोई बीमारी नही है। इससे व्यक्ति का वर्तमान जीवन आराम से क़टते रहता है। हल्की परेशानी का उपाय होते रहता है और रोगी को आश्वासन मिलते रहता है जिससे की समय को गति का पता नही चलता है। यदी कोई परेशानी हुई तो कहा जाता है कि दुनिया की यही रिती है इससे तो सहना ही परता है। जिससे व्यक्ति की सहानुभूति के प्रति निष्ठाबान बना रहता है और जिंदगी जिए जाता है।
10 अक्टूबर का खास दिन इसी भाव को समझने और लोगो को इसके लिए तैयार करने को लेकरके है जिससे कि उसके मन मे सकारात्मक विचार का सुत्रापात हो और जीवन सुगम से कटता हुआ चला जाए। पैटिएटिव केयर दिवस इस बात को समझाता है कि जहां तक मानव को स्वास्थ्य मे सुधार की गुन्जाईस है वहां तक तो कोई परेशानी नही है पर जहां पर जाकर रुक जाता है। वहां से पैटिएटीव केयरका कार्य सुचारु रुप से चलाने की जरुरत है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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