विश्व आधात (ट्रॉमा) दिवस
विश्व आधात (ट्रॉमा) दिवस ( World Trauma Day )
स्वास्थ्य रहते हुए कार्य को करने की आदत अच्छी बात है लेकिन व्यस्तता की भी एक सीमा होती है जिसपर दिमाग सही से कार्य करता है और शांतचित से फैसले लेता है। फैसला लेने के लिए सभी विचार को एक साथ लेना होता है इसके लिए उच्च कार्य उर्जा के साथ दिमाग के एक विषय पर एकाग्रचित होना जरुरी है जिससे की निर्णय उच्च कोटी का हो सके। कार्य करते हुए आगे बढ़ना एक अच्छी बात है लेकिन हमेशा एक ही दिशा मे सोचना कार्य वाधा के आने पर मन अस्थिर हो जाता है जिसका असर व्यापक होता है। हमेशा लाभकारी विषय के चिंतन के साथ आगे बढ़ते हुए दिमाग को जब कोई ठेस लगती है तो व्यक्ति तनावग्रस्त हो जाता है। तनाव मे उसका मानसिक संतुलन सही नही रहता है। हमारा दिमाग तनाव के बात को फोकस करते हुए अन्य बात को विस्मरण कर देता है जिससे की निर्णय सही नही रहते है।
तनाव मे व्यक्ति की सोचने की बृति के साथ आव-भाव और चाल भी बदल जाती है। वह सारे कार्य को करने की जल्दीवाजी करता है। एक कार्य के लिए निर्धारित समय मे दुसरे कार्य के बारे मे सोचने लगता है जिससे की उसका वर्तमान ठीक नही रहता है और भविश्य भी गड़बड़ा जाता है। इस प्रक्रिय के लम्बा चलने पर दुर्घटना की प्रक्रिया भी बढ़ जाती है। इस बढ़ती दुर्धटना से जो सीख लेता है वह तो बुद्धीमान है लेकिन जो नही सीख पाता है वह दुर्धटना का शिकार हो जाता है। दुर्धटना कभी समझाकर नही आती है बल्की वह हमारे किसी कमजोरी का ही नतीजा होता है। जो लोग ध्यान करते है उनको तनाव से तुरंत बाहर निकलने की क्रिया का ज्ञान होता है और वह परिस्थिती के अनुरुप स्वयं को ढ़ाल लेता है। जो ऐसा नही करते है वह स्वयं के प्रति न्याय नही कर पाते है।
दुर्धटना होने के बाद की प्रक्रिया बेहद जटील होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि दुर्धटना किस प्रकार की है। यदी बेहद गंभिर दुर्धटना हो तो तुरंत जीवन रक्षक प्रयास करने चाहिए। पहले सांस की प्रक्रिया के जारी रहने की परताल की जाय। उसके बाद धड़कन की जांच की जाय। इसके बाद खून निकलने की क्रिया को रोका जाय। इस सारी प्रक्रिया को ततकाल व्यवस्थित करने के बाद ही रोगी को गणतव्य स्थान तक ले जाया जाय जिससे की उसका उचित इलाज हो सके। यदि किसी व्यक्ति को हल्का जख्म है तो उसके लिए तुरंत समुचित उपाय करने चाहिए जिससे की संक्रमण की प्रक्रिया से बचा जा सके।
गावों मे रहने वाले लोग को टुट फुट होने पर पानी और गोबर से बचना चाहिए। चोटिल स्थान को ढककर रखते हुए प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया को करने चाहिए फिर उसे चिकित्सक दिखाकर कार्य को करने की जरुरत है जिससे की उसका इलाज समय से हो सके। आजकल आये दिन बाहन चालक की लापरवाही सामने आती है जिससे दुर्धटना की शिकायत बढ़ी है। नशा लेकर गाड़ी चलाना खतरनाक होता है इस बात को जानने के बादजुद गलती कर बैठते है। यदि किसी भी तरह की समस्या हो तो ततकाल वहां उपस्थित व्यक्ति से सहायता लेनी चाहिए क्योकि जो वहां होता है वही महत्वपुर्ण व्यक्ति होता है। इसके लिए स्वयं पर विश्वास रखना जरुरी है।
यदि कोई दुर्धटना हो तो पहले निकटतम सेंटर पहुंचकर इलाज करावें उसके बाद आगे जाने की प्रक्रिया को सोचा जाना जरुरी होता है। जानकारी एक जरुरी प्रक्रिया है क्योकी यही वो पूजी है जो व्यक्ति को न्यायोचित व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है और उसका सुरक्षा भी प्रदान करता है। एक स्वस्थ्य चितक को परेशानी कम होती है और यदी होती भी है तो वह तुरंत कोई उपाय निकाल लेता है जिससे की उसको बचने का समय मिल जाए।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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