Albinism

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रंगहीनता

   यह एक जीन आधारित बिमारी है। इसमे त्वचा का रंग सफेद हो जाता है। जिससे व्यक्ति को कई तरह की पऱेशानी का सामना करना परता है। यह बिमारी अनुवंशकी मे होने वाले गड़वड़ी से संबंधित है। इसका अभी तक कोई सटीक ईलाज नही है। इसके ईलाज की खोज की प्रयास किये जा रहे है। इस बिमारी से जुड़े लोगो को जानकारी और इससे संबंधित बचाव के उपाय के उदेश्य से आज का अच्छा है। इससे इस बिमारी के विकाश इसमे होने वाले परिवर्तन और समाजिक समस्या के प्रति लोगो का जहां ध्यान खींचा जाता है वही इसके बचाव के उपाय से लोगों से लोगों की परेशानी को भी कम किया जाता है।

इस बिमारी माता पिता के के प्रभावित अनुवंशकी जीन जिम्मेदार है। यह बिमारी X लिंक क्रमोजोम से संबंधित है। इस क्रोमोजोम मे बदलाव के कारण त्वाचा की कोशीका मे बनने वाला मेलानीन पिगमेंट प्रभावित होता है। जिससे त्वाचा का रंग सफेद हो जाता है। इस बिमारी मे X लिंक जीन कैरियर का काम करती है। एक जीन माता से और एक जीन पिता से जिस बच्चो को प्राप्त होता है उस बच्चो को ये बिमारी हो जाती है। इसमे नेत्रीय अल्बिनिज्म अधिकांश पुरुषो पाया जाता है। जबकि आँकुलोक्यूटेनियस एल्बिनिज्म तो इसकी संभावना बच्चे और बच्ची दोनो मे रहती है।

कैरियर जीन अकेले बिमारी पैदा नही करता है। इस बिमारी के लिए माता और पिता दोनो से जीन चाहिए होता है। प्रभावित व्यक्ति मे कई तरह के पेटर्न देखने को मिलता है। इससे इसको कई प्रकार मे बांटा जाता है। इसमे आँख के रोशनी मे कमी यानी की धुंधलापन दिखता है। इसमे कभी त्वाचा का रंग हल्का पीला और हल्का लाल भी होता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस व्यक्ति मे मेलानिन पिगमेंट कितना बनाता है।

इस बिमारी से ग्रसित लोगो को केसर की शिकायत देखने को मिलती है। इसके लिए उसको सूर्य के तेज रोशनी से बचाव करना होता है। आंँख की शिकारय के लिए सुविधा के अनुसार दिनचार्य मे बदलाव करना परता है। इस तरह के बिमारी से पिड़ित को जीन से जुड़ी जनकारी लेन थोड़ा कठीन होता है। विज्ञान के विकाश की इस मे इस दैर मे इसको ठीक करने के प्रयास किये जा रहे है। आने वाले दिन मे इसका ईलाज भी संभव होगा। होमियोपैथिक में संक्रमण से स्ंबंधित बिमारी के लिए ईलज है। इस बिमारी से ग्रसित लोगो की इम्यून पावर कम हो जाताी है। इसके लिए इससे संबंधित दवा से इसका निादान किया जाता है।

इस दिवस पर ध्यानाकर्षण से जानजागरुता बढे़गी वही पर पिड़ीत तक भी पुरी जानकारी बढ़ेगी जिससे की उसकी परेशानी कम होगी। जय हिन्द

लेखक एवं प्रेषकः- डॉ अमर नाथ साहु

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