विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस
विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस ( World Osteoporosis Day )
कैल्शियम की कमी के कारण होने वाले इस बीमारी का प्रभाव गहरा होता है। कैल्शियम की लगातार कमी बनी रहती है तो शरीर अपने कैल्शियम की कमी को पुरा करने के लिए हड़्डी से कैल्सियम को लेता है जिसके कारण हड्डी कमजोर हो जाती है। इस प्रक्रीया को आँस्टियोपोरोसिस कहते है। इस क्रिया मे हड्डी काफी कमजोर हो जाती है जिसके कारण हड्डी की टुटने की क्षमता आसान हो जाती है। व्यक्ति पतला दुवला हो जाता है।
यह प्रक्रिया पुरुषो की तुलना मे महिलाओं मे ज्यादा देखने को मिलती है। कमी काफी दिनो तक चलने के बाद शरीर मे थकान का जल्दी होना तथा थोड़ा भी कार्य करने पर कमर दर्द शुरु हो जाता है। धिरे-धिरे कई तरह की बीमारी होने लगती है जिसमे त्वचा की बीमारी भी सामिल है। इसको दुर करने के लिए कैल्शियम की मात्रा विटामिन डी के साथ लेने की जरुरत है जिससे की विटामिन की कमी को दुर किया जा सके। इसक लिए जरुरी जांच को कराते रहने की जरुरत है।
65 वर्ष की उम्र के बाद कैल्शियम की मात्रा की जांच को करना जरुरी हो जाता है। वोन डेन्सीटी को कम होने की शिकायत मिलती रहती है। खाने वाले भोज्य पदार्थ मे कैल्शियम की मात्रा को बढ़ाने की जरुरत होती है। कैल्शियम से युक्त भोज्य पदार्थ है दुध और डेरयी प्रोदक्ट, हरे पत्तेदार सब्जीयां, अनाज में रागी और राजगीरा, चिया सिड्स और बदाम, सूखे आंजीर टोफू और सोया दुध, छोटी मछलियां भी लाभदायक है। चना मे भी कैल्शियम प्रचूर मात्रा मे पाया जाता है। अपनी सुविधा के हिसाव से इस भोज्य पादर्थ को खा सकत है।
विटामिन डी के लिए सुर्य के प्रकाश के स्त्रोत का होना जरुरी है। सुबह की गुणगुणी धुप का स्नान लेना लाभदायक होता है। कार्य को जानने और व्यवस्था के साथ जीने मे फर्क है जो व्यक्ति खुद को आपने जानकारी के हिसाव से खुद को नियंत्रित करते है उसके लिए विकास के साथ सफलता के द्वार खुले रहते है। बीमारी के होने का इंतजार नही करे स्वयं के लिए जरुरी आहार को अपने भोज्य पादार्थ मे सामिल करे और खुद को इसके लिए तैयार रखे जिससे की आपको बीमार होने की नौवत ही ना आवे।
20 अक्तूबर 2026 का खास दिन इसी भाव को विचार के लिए खास बनाया गया है जिससे की लोगो को समय से खान-पान मे सुधार करते हुए अपने को स्वस्थ्य और व्यवस्थित करने मे मदद मिले। अपने विचार को अपनो के साथ साझा करे जिससे की अपने गुणकारी भाव को लाभ दुसरो को भी मिले और इस बीमारी से लोग प्रभावित ना हो सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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