विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस( World Mental Health Day)
आजकल के जीवन की बढ़ती चुनौती का सामना करते हुए जीवन सोपान पर आगे बढ़ना परता है। यही से मानसिक दवाव की प्रक्रिया शुरु होती है। शुरुआत मे जब कार्य उर्जा सक्षम रहता है और तन मन भी उच्च उर्जा के प्रवाह को झेल लेता है तो कार्य चलते रहता है। समय के साथ परिवर्तित होते परिस्थती व्यक्ति को एक सुत्र मे बांध देता है जहां से बाहर निकलना कठीन हो जाता है। यही कठीनाई मानसिक स्वास्थ्य को बिगार देता है। बिगरते मानसिक स्वास्थ्य कई तरह के विसंगतियां लेकर आती है। सबसे उपर रहता है की सुखचैन छीन जाता है। मन रुग्न रहने लगता है।
मानसिक स्वास्थ्य को सही रहने के लिए कार्य दवाव को सही करना और अपने कार्य क्षमता के हिसाब से कार्य को संचालन करने की जरुरत होती है। इस गुणात्मक पहलू का सबसे बड़ा भाग है चाहत की प्रवलता जो कार्य को नियत्रित करती है। यह विधा देखने और सुख चाहने की प्रबृति का नतिजा होता है। कभी ऐसा भी होता है कि हमारे कीसी खास तरह के विचार के बिरोधी लोगो का भी शिकार हो जाते है तो मानसिक स्वास्थ्य बिगने लगता है। हर समय और जगह पर अपने को नियंत्रित और संयमित रखने की जरुरत होती है जिससे की जीवन उतकर्ष को पाया जा सके।
आजकल बदलती जीवन शैली भी मानसिक स्वास्थ्य को बिगार रहा है। मानव का एकाकीपन बढ़ने लगा है जिसके कारण लोग अपनी आंतरिक विचार को प्रकट नही कर पाते है जिससे उसका भावनात्मक दवाव बनने लगता है जिससे मानसिक स्वास्थ्य विगरने लगा है। मन के विकार को दुर करने के लिए लोगो के साथ अपने विचार को व्यक्त करने तथा कुछ नया अवलोकन करने की जुरुरत है। सिर्फ देखना ही काफी नही होता है उसकी अनुभूती भी जरुरी होता है जिससे की उसके आंतरिक परिशोधन का कार्य पुर्ण हो सके।
10 अक्टूबर के खास दिन को इसी भाव के लिए नियोजित किया है जिससे की जीवन को एक नये साचे मे ढाला जा सके और जिवन सुखमय हो सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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