विश्व रक्तदाता दिवस

विश्व रक्तदाता दिवस World blood donor day
रक्त को संयोजी उत्तक के रुप मे जाना जाता है। यह धमनी और शीरा के माध्यम से प्रत्येक कोशिका तक आवश्यक तत्व का संवहन करता है जिससे कोशिका अपना पुरा जैविक कार्य आसानी के पुरा कर पाता है। मह्त्वपुर्ण तत्व मे ऑक्सीजन को कोशीका तक पहुँचाना और कार्वऩडाईऑक्साईड को कोशीका से बाहर वातावरण तक पहुँचाना साथ मे पोषक तत्व को भी कोशीका तक पहुचाना और बर्ज्य पदार्थ को कोशीका से बाहर लाना होता है।
रक्त यानी खून की जरुरत कई कारणों से होता है। जिसमे रक्त का कम बनना, बने हुए रक्त का थक्का बनना, रक्त का रक्त नलीका से लगातार बाहर निकलना आदी सामिल है। एक स्वस्थ्य व्यस्क मानव शरीर मे लगभग 4.5 से 5.5 लीटर रक्त होता है यानी शरीर के कुल बजन का 7-8% होता है। शरीर औसतन रोज 40 से 70 मिलीलीटर नया खून बनाता है।
यदि किसी दुर्धटना या और किसी कारण से रक्त का नुकसान 1 लीटर से अधिक होता है तो पिड़ीत व्यक्ति को रक्त की तुरंत आवश्यकता होती है जिससे की उसको बचाया जाय। यदि 1.5 लीटर से अधिक रक्त का नुकसान हो जाय तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। इस स्थति मे ऱक्त को बाहर से देना परता है। इसके लिए रक्त के दाता की जरुरत परती है। जो स्वस्थ्य हो किसी भी संक्रामक बिमारी से पिड़ित ना हो वो पुरुष 3 महीना और महीला 4 महीना के अन्दर रक्त दान न किया हो वो अपना रक्त दान कर सकता है।
रक्त नालिका मे प्रवाहित रक्त सभी लोगों के रक्त के रंग तो एक जैसे होते है लेकिन उसकी आंतरिक संरचना मे कुछ अलग होता है जिससे यदि रक्त मिलान किये बगैर रक्त चढ़ा दिया जाय तो रक्त का थक्का बनने लगता है। इस तरह से रक्त के प्रमुख रुप से चार प्रकार होते है। रक्त चढ़ाने से पहले इसका मिलान किया जाता है इसके बाद ही रक्त चढ़ाया जाता है। अब ब्लड बैंक की सुविधा हो गई है। जिसके कारण किसी भी प्रकार के रक्त को ब्लड बैंक को दान किया जा सकता है वदले मे बैंक उसके जरुरत के रक्त उस व्यक्ति को दे देता है। जिससे सही समय पर जरुरत मंद को रक्त उपलब्ध हो जाता है।
रक्त दान करने वाले बहुत सारे लोग प्रेफेशनल हो गये है जिससे की उसके रक्त की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस तरह के लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए जिससे की उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकुल असर ना परे। समय-समय पर रक्त दान शिविर लगाया जाता है जिससे की रक्त दान करने वाले खुशी से दान कर सके। इससे जरुरमंद को रक्त सही समय पर मिलने मे आसानी होती है। ऐसी भी सुविधा है कि रक्त दान करने वाले को यदी स्वयं के रक्त की जरुरत होती है तो उसको अपने दान के रक्त आसानी से उपलब्ध हो जातें है।
विश्व स्तर पर लोगों को जागरुक करने के लिए रक्तदान दिवस को व्यवहार में लाया गया है। समाज को इस कार्य के लिए आगे आने की जरुरत है जिससे की जरुरत मंद को आसानी के रक्त मिल सके। एक बार मे एक यूनिट यानी की 350 – 450 मिलीलीटर रक्त निकाला जा सकता है। ये शरीर के लिए सुरक्षित रक्त की मात्रा के अंदर है इसलिए इससे किसी प्रकार की कोई परेशानी नही होती है।
कुछ बिमारी जैसे HIV/AIDS, Hepatitis B और C, सक्रिय कैंसर, गंभीर ह्दय रोग, हीमोफिलिया और बुखार आदी से पिड़ित व्यक्ति की रक्त नहीं ली जाती है। रक्तदाता के लिए न्युनतम 18 और अधिकतम 65 बर्ष आयू निर्धारित की गई है। वजन लगभग 50 किलो, तापमान 37.5°C या 99.5° होनी चाहिए, नाड़ी 50 से 100 प्रति मिनट के बीच हो, ब्लड प्रेशर सिस्टोलिक 100-180 mm of Hg और डायस्टोलिक 50-100 mm of Hg के बीच हो। रक्त दान करने से पहले पानी भरपुर मात्रा मे पीना, अच्छी निंद लेना, तथा पोष्टीक आहार लेने की जरुरत होती है। यदी एंटीबायोटीक दवा ले रहे है तो 72 घंटे पहले बंद कर देनी चाहिए।
रक्त दान करने पर दान किये गए रक्त के प्लाज्मा 24 से 48 घंटे में पूरा हो जाता है। जबकि लाल रक्त कोशीका को बनने मे 04 से 06 सप्ताह का समय लग जाता है। इस अवधि मे व्यक्ति के शरीर मे प्रयाप्त रक्त की मात्रा यानी पहले की तरह हो जाती है। रक्त दाता को जागरुरक करने के उदेश्य से इस दिवस की प्रासागिकता बहुत बढ़ गई है।
लेखक एवं प्रेषकः- डॉ अमर नाथ साहु
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