नेशनल ट्रेन योर ब्रेन डे
नेशनल ट्रेन योर ब्रेन डे (National Train Your Brain Day)
मस्तिष्क मानव जीवन की सबसे बड़ी पूजी है। जो लोग दिमागी रुप से स्वस्थ्य है वही इस जीवन को गहराई से महसुस कर सकते है। जो मानव जीवन मे रहते हुए भी मानसिक रुप से स्वस्थ्य नही है उनका जीवन काल चक्र की पहीया पर बस घुम रही है। इस घुमते चक्र के बाद जो आत्मीय व्यवहार होगा वह फिर एक स्थिर जीवन को प्राप्त करेगा और कुछ नया करने के लिए आगे बढ़ेगा। वर्तमान जीवन ही महत्वपुर्ण जीवन है। इसी जीवन मे ये तय होता है कि हम आने वाले कल के लिए कितने सबलता हासिल किये और हमारा अगला कदम क्या होगा।
स्वस्थ्य मस्तिष्क के लोग अपने जीवन को उच्च विचार से अच्छादित करते हुए उन्नत भाव को प्रतिपादित करते है जिससे उनके कार्य का संयोग बना रहता है। इसी बनते संयोग से उनकी अनुभूत गहरी हो जाती है। इस गहरी अनुभूती के फलस्वरुप ओ प्राकृति को और आसानी से समझ सकते है। उनकी यही समझ उन्हे उन्नत बनाती है और वह भविश्य की अच्छी गणना कर सकता है। इस गणना और विश्वस के साथ मानव जीवन के अंदर एक उन्नत चेतना का विकास होता है। विकास की ये प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। इसी प्रक्रिया को बार-बार दुहराने के लिए जन्म दर जन्म लोग प्रयत्नशील रहते है।
हमारी अनुभूती ही हमे यथेष्ठ बनाती है। हमारे विश्वास को मजबूत करती है जिसके सहारे हम मान सम्मान को पाते हुए आनंदित होते है और जीवन को सफल कहते हुए इस जगत से बिदा होते है। अनुभुति की प्रबलता को पाने के लिए किये जा रहे प्रयास मे ब्रेन को अभ्यस्त करना जरुरी होता है। हमारे ब्रेन यानी की मस्तिष्क को हम जिस प्रक्रिया से गुजारते है उसका वो अवलोकन करता हुआ अपने को यथेष्ट बनाता है और अपने अनुभव को बढ़ाता है। इसी व्यवस्था को और उच्च बनाने के लिए हमे लगातार प्रयासरत रहने चाहिए। जीवन अनमोल है क्योकि हमारी अनुभूति को बढाना होता है और हमे आगे बढ़ते जाना है।
मस्तिष्क को सिखाने की क्रिया कई तरह से की जाती है जिसमे पहला आता है करके देखना इसमे व्यक्ति कार्य को करता है और मिलने वाले परिणाम की अवलोकन करता है और आगे बढ़ता है। दुसरा वाला है पहले से सिखे गये लोगो की बताये गये विचार तक अपनी पहुँच बनाना फिर उसके आगे की सोच को बनाना जिससे की समय के साथ कार्य उर्जा की भी बचत होती है। आज के मानव के विकास की गाथा का भी यही आधार है। तिसरा है सब जानते हुए भी वही करना जो हम चाहते है। इस तरह की सोच बाला व्यक्ति एक स्थिर जीवन जीकर चला जाता है। इस प्रकार वो एक व्यवस्थित जीवन जीते हुए खुद को एक खास तरह की अनुभूति तक सिमित रहता है जिसमे वो खुश भी दिखाई देता है। इसको समान्य जीवन की श्रेणी मे रखा जाता है।
चौथा है खास तरह के मकसद के लिए जीना इसमे व्यक्ति एक मिशन को अपनाता है और आगे बढ़ते जाता है और अंततः खुद के लिए कुछ सिख लेकर बिदा हो जाता है। जीवन के कई पहलू है जिसको बारिकी से समझते हुए आगे बढने की कला के धनी लोग कभी निराश नही होते है और लगातार बढते रहते है। खुद को तैयार करने के लिए किये जा रहे यथेष्ट प्रयास को बल प्रदान करने के लिए आज के दिन को विशेष बनाया गया है जिससे की लोगो की जिवन स्तर को उच्च बनाया जा सके।
हमे चाहिए की हम सभी इस खास व्यवस्था का लाभ उठावें और सतत क्रियाशील जीवन को पाते हुए इस जीव जगत मे एक उच्च स्थान प्राप्त करे। इसी विचार को जन जागरण का संदेश देता 13 अक्टूबर का दिन को खास बनाया गया है। आइये खुद के लिए एक वेहतर जीवन का निर्माण करे और समाज के उन्नती मे एक अध्याय को जोड़े।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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