विश्व वघिर दिवस
विश्व वघिर दिवस (World Deaf Day)
काम हमारे लिए काफी महत्वपुर्ण है। इसकी सुरक्षा हमे करनी चाहिए। कान मे कई तरह की बीमारी होती है जो सुनने की क्षमता को प्रभावित करती है। कुछ बीमारीयां जन्मजात होती है। कुछ बीमारीयां हमारी सुझबुझ के कमी के कारण भी होती है। आजकल के बदलते परिदृष्य मे कुछ नया करने के लिए उत्सुक तो होते है पर उसके दुषपरिणाम का भी ख्याल रखना जरुरी है।
कान के जन्मजात बीमारी मे कान के आंतरिक संचरना का पुरी तरह से विकसित नही होने से परेशानी होती है। इस तरह के लोग जन्म से ही बाहरी आवाज को नही सुन सकते है। जिसके कारण इनको बाहरी आवाजो को संकेत के माध्यम से समझने होते है। इसके लिए खास तरह के पेटर्न का उपयोग करते है जिससे ये अपनी भाषा को दुसरों तक आसानी से पहुंचा सकते है। लोगो को इस बात की जानकारी होनी जरुरी है। इसके लिए खास तरह के शिक्षा का भी प्रवंध है।
कुछ बीमारीयां समय के साथ आ जाती है जिसमे पहला है कान का संक्रमण कान के अंदर वैक्स गलेण्ड होता है जहां से कान मे वैस्स का स्त्राव होता है जिससे कान की नली मे नमी बनी रहती है। कभी-कभी इसमे संक्रमण के कारण खुजली होती है। जिसके यदी किसी तेज नुकीली बस्तु से खुरच दिया जाय तो कान मे संक्रमण बढ जाता है और काम मे मबाद बनने लगता है। जिससे कान के सूजन के साथ तेज दर्द भी होती है। कान के दर्द के कारण रात को निंद भी नही आती है।
बच्चो मे कान बहने के पुरानी शिकायत भी मिलती है। जिसको की ध्यान देने की जरुरत है। कान के ये सुजन ठीक नही होने से कान मे गांठ भी बन जाती है जो सुनने के लिए कठीनाई पैदा करती है। इसको इलाज के जरीये दुर किया जा सकता है। कान अधिक दिन तक बहने के कराण इसका संक्रमण ऊपर मष्तिश्क तक चला जाता है जो काफी गंभीर समस्या पैदा करता है इसको समय से इलाज करा लें।
कान मे वेक्स को काफी जमा हो जाने के कारण भी सुनाई कम परने लगता है जिससे की समस्या बड़ी हो जाती है। इसको सही तरह से निकालने की जरुरत होती है। कान के अंदर की त्वचा काफी नाजुक होती है इसलिए इसको साफ करते समय रुई को किसी साफ लकड़ी के सहारे लगाकर हल्की हल्की साफ करे। काम मे कोई अच्छी दवा डाले जिससे की कान के संक्रमण से बचाव हो।
कान के परदे मे छेद हो जाने के कारण भी कम सुनाई परती है या नही सुनाई परती है जिसके कारण काफी समस्या का सामना करना परता है। इसके लिए जरुरी इलाज कराना चाहिए जिससे की इस समस्या का समधान हो जाय। आजकल कान से नही सुनाई परने वाले के लिए मशीन भी आ गई है जो कम सुनाई परने वाले के लिए एक उपयोगी बस्तु है।
काम मे इयरफोन लगाकर सुनना, तेज आवाज मे सुनना, शोर बाले आवाज के बीच असहज रहते हुए भी इसको सुनना काम को नुकसानदेश पहुँचाता है। काम मे सटाकर मोबाईल से बातचीत करने से काम को गर्मी के साथ अनावश्यक तरंग का भी सामना करना परता है जिससे कान की समस्या बढ़ने लगी है। इसके लिए सावधानी बरतनी चाहिए।
कान हमारा नाजुक अंग है इसलिए समय से इसको इलाज कराकर सही से सुनने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने चाहिए। बधिर होने के बाद उसके सही तरह से समाज के बीच रहते हुए अपने जीवन यापन करने के लिए जो आधुनिक व्यवहार उपलब्ध है उसका उपयोग करना चाहिए। उसके साथ सभी व्यक्ति को सम्मान की भावना का व्यवहार करना चाहिए जिससे की उसको आत्मग्लानी महसूस नही हो। इसी विषय को जन जन तक पहुँचाने के लिए 27 सितम्बर के दिन को खास बनाया गया है। जिससे की लोगो को समाज के साथ सही तरह से रहने और व्यवहार करने का सुअवसर प्राप्त हो सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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