संभोग, क्वाईसन,
संभोग एक पुर्ण योग जानकारीयाँ
Sambhoj Rog Nidan
सम्भोग-रोग निदान

 

 

 

 

 

 

 

 

 

संभोग रोग निदान

  1. महिला या स्त्री मे और
  2. पुरूष मे

महिला या स्त्री मे

इसे कई नामो से जानते है जैसे- मेथुन, काम, काम  क्रिड़़ा, सहवास, सेक्स, इत्यादी। इस क्रिया मे नर का लिंग मदा के योनि मे गति की क्रिया करता है। संभोग की अपनी प्रवृती होती है। जिससे युगल दम्मपती को एक सुखद एहसास होती है। यदि प्रकृती और प्रवृती मे अंतर पर जाए तो संभोग असहज हो जाता है। यहां महिलाओं मे होने वाले अतिविशिष्ट स्थिति का वर्णन कर रहे है, जिसका पुर्ण इलाज संभव है।

  1. संभोग के समय वेहोशी।
  2. संभोग के बाद रक्तश्रव
  3. दर्द युक्त संभोग
  4. संभोग से घृणा 
  5. आनंद की विसंगती
  6. संभोग मे बाधा से बिमारीयाँ।
  7. कामोत्तेजना
  8. वैवाहिक संभोग से इंकार।
  9. संभाग करनेे के बाद की इच्छा मे कमी का नही होना।
  10. संभोग जैसा एहसास होना।
  11. संभोग की तरह कामुकता का एहसास।

उपरोक्त बीमारीयो का सही एवं समपुर्ण इलाज संभव है।लोकलाज के कारण महिला प्रायः इसे नीजी समस्या मानकर इलाज नही कराती है या उन्हे इस तरह की बीसंगतीयाँ को बिमारी समझना संभव ही नही हो पाता है। यहां इसका वर्णन जानकारी और इलाज दोने के उदे्शय से किया जा रहा है।

  • संभोग के समय बेहोशी

य़ह वीमारी ऐसी महिला को होता है जो प्रायः शारीरीक रुप से बहुत संवेदनशील होते है। कामुक स्त्री मे यह रोग देखने को ज्यादा मिलता है। हल्का शारीरीक टच (छुना) से ही शरीर मे उत्तेजनशीलता पड़वान चढ़ने लगती है। अती संवेदनशील होने के कारण कभी-कभी सेक्स के दौरान वेहोशी भी आ जाती है। कामुकता वढ़ने के कारण महीलाओ मे हस्तमैथुन की क्रिया को देखा जाता है। कभी-कभी ओभरी मे भी सीस्ट या ट्यूमर का वनना इसका कारण बन जाता है। यूटेरश का बाहर आना या उसका टच करने से अधीक सेवेदनशीन होना इसका कारण बनता है। गुस्सा के कारण रोने लगना भी होता है। विभिन्न प्रकार के आवेग का आना जो उसके मस्तिस्क को अती सोवेदनशीन बना देता है बेहोशी का कारण बनता है। इसका पुर्ण इलाज संभव है। समय के साथ होने वाली जटीलता से बचने के लिए समय पर उचित इलज हेतु सम्पर्क करे।

  • संभोग के बाद रक्तश्राव

इस विमारी का सम्बन्ध युटेरश के अंदर की गरबरी के कारण होता है। इस गड़बड़ी या खराबी के कारण सहवास के बाद रक्तश्राव होता है। असुरक्षित सम्बन्ध बनाने के कारण भी कभी- कभी रक्तपात होता है। पेड़ु मे दर्द बना रहता है। सुजन की समस्या भी रक्तपात का कारण बनता है। मासिक का रक्त रूका रहने के कारण भी इस तरह की शिकायत मिलती है। अंदर मे किसी तरह का घाव का शिकायत रहने पर भी रक्तश्राव के शिकायत देखने को मिलता है। युटेरह के मुख मे सुजन के कारण भी सहवास के बाद रक्तश्रव की समस्या होती है।

  • दर्द युक्त संभोग

योनि को सुखा रहने पर यदि रति कि क्रिया किया जाता है तब दर्द का होना स्वाभाविक होता है। योनि मे सुजन या संक्रमण के कारण सहवास के समय दर्द होता है। मासिक के समय यदि सहवास कि क्रिया किया जाता है तो योनि के नाजुक होने के कारण कभी- कभी दर्द होता है। यदी पेड़ु मे सुजन की सिकायत हो तो यह समस्या आ आती है।

    • योनि के सुखा होने के कारणः-
    • योनि के सुखा होने से संभोग के समय योनि मे शिश्न के धर्षण के कारण योनि मे गर्मी बढ़ जाती है तथा योनि के दिवाल मे टुट-फुट होने की सम्भावना भी बनी रहती है जिससे दर्द का कारण बनता है। इसका ईसाज करके इसे ठिक किया जाता है।
  • संभोग से घृणा

गहरी निराशा, कोई सदमा मानसिक बिकृती के कारण संभोग से घृणा हो जाता है। कभी-कभी डर भी ईतना गहरा होता है कि स्त्री के अंदर की समझ मे गहरी विकार पैदा हो जाता है जिसके कारण वह संभोग से घृणा करने लगती है। इसका ईलाज सम्भव है यदी रो समय से ईलाज करावे। हार्मोनल अनियमितता के कारण भी स्त्री के अंदर विकार पैदा हो जाता है।

    • कमजोर महीला मेंः-
    • कमजोर महीला मे संभोग से घृणा का कारण मानसिक अवसाद का होना होता है जो शरीर के कमजोर होने के कारण पैदा होता है। अतः कमजोरी को दुर करके इसे ठीक किया जा सकता है। कमजोरी भी कई कारणों से होता है जिसका पता लगाकर उसका निदान किया जाता है।
    • खड़ेचने और दाँत काटने से बचने को लिएः-
    • कभी-कभी संबंध मे खटास आने या अन्य कारणों से भी हिंसक प्रबृति का जन्म हो जाता है जिसके कारण पुरुष का व्यवहार खड़ोचने तथा दाँत काटने तक पहूँच जाता है, जो महीला को संबंध के प्रती घृणा का भाव बना देता है। अतः मानसिक तथा व्यवहारीक दोनो पहलू को अपनाकर समस्या का समाधान करने की जरूरत है।
    • प्रसव के अन्त तकः-
    • गर्भ के बच्चे के बिषेश प्रक्रिया के कारण संभोग से घृणा का भाव पैदा हो जाता है, जो प्रसव के अंत तक चलता है, तथा इसके बाद यह स्वतः ठीक भी हो जाता है। य़दी सिकायत फिर भी बनी रहती है तो आप दवा का सहारा ले सकते है।
    • शोक के बादः-
    • शोक के बाद मानसिक सिथिलता आ जाती है जिससे संभोग के प्रती घृणा का भाव पैदा हो जाता है।इसका इलाज शोक के कारण को दुर करके किया जा सकता है।
    • श्वेद प्रदर के समयः-
    • श्वेद प्रदर के कारण भी संभोग से बिरक्ति का भाव मन मे पैदा हो जाता है अतः इसका इलाज श्वेद प्रदर को ठीक करके किया जा सकता है।
    • रजनोवृत्ति के समयः-
    • रजनोवृत्ति के समय महीला के शरीर मे जरुरी बदलाव होने लगता है तथा हार्मोनल परिवर्तन भी होने लगता है योनी भी सुखा हो जाता है। अतः संभोग से घृणा का भाव भी देखने को मिलता है।
    • मासिकधर्म के बादः-
    • मासिक धर्म के बाद योनी नजुक अवस्था मे रहता है, जिससे संभोग के प्रक्रिया दर्द युक्त हो सकता है। यह अवस्था प्रयः सम्बेदनशील महीला मे देखने को मिलता है। इसका निदान ईलाज के द्वारा किया जा सकता है।
    • गर्भावस्था के समयः-
    • इस समय मे गर्भवती महिला के  शरीर मे बदालव के कारण संभोग की क्रिया के प्रती ध्यान का नही बनना देखने को मिलता है लेकिन संवेदनशील महीला इस बाधा को भी पार कर सकती है। इसका ईलाज भी संभव है। यह कहा जाता है कि यदी  गर्भावस्था के समय यदी संभोग की क्रिया से बचा जाय तो जच्चा तथा बच्चा दोनो के लिए अच्छा होगा।
    • योनिशोथ मेः-
    • इस प्रक्रिया मे योनि मो सुजन आ जाती है जो संभोग के समय दर्द का कारण बनता है जिससे संभाग के प्रती घृणा के भाव को जन्म देता है। अतः इसका ईलाज कराकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।
  • आनन्द कि विसंगति

यह मानसिक तथा पैथोलोजिलक दोनो तरह के गड़वड़ी के कारण पैदा होता है। अतः इसका ईलाज समय से कराने पर यह पुर्ण रूप से ठिक हो जाता है।

    • संभोग मे आनन्द की अभाव-
    • संभोग के समय मे आनन्द मे अभाव का होना योनी के शिथिल पड़ जाने या अनिक्षा होने के कारण प्रयः होता है अतः इसका ईलाज करके आनन्द पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
    • संभोग मे आनन्द की कमीः-
    • इस अवस्था का कारण योनी का ढ़िला पड़ना ज्यादा गीला रहना आदी होता है। कभी-कभी मानसिक कारण भी होता है अतः कारण का ईलाज करके इस बाधा को ठीक किया जा सकता है।
    • संभोग के आनन्द मे बृधिः-
    • इस अवस्था का कारण मानसिक तथा शारीर के अंदर किसी दवा का प्रभाव हो सकता है जिससे संभोग मे बृधि देखने को मिलता है। चहत का नशा संभोग के बाद भी बना रहता है जिससे उसके स्वभाव मे बदलाव भी देखने को मिलता है। अतः कारण के पता करके इसका ईलाज संभन हो जाता है।
  • संभोग मे बाधा से बिमारीयाँ

संभोग मे बाधा के कारण मानसिक तनाव बढ़ता है। शारिरीक बिषमता से उत्पन्न होने वाली यह तनाव समय के साथ बढ़ता जाता है। समय के साथ यदी इसका समाधान मिल जाता है तो महिला खुश होती है। महिला के स्वभाव मे बदलाव भी देखने को मिलता है।

  • कामोत्तेजना

कामोत्तेजना कम या ज्यादा होने के कारण महिला को परेशानी का सामना करना प़ड़ता है। इसे गुप्त रोग के रूप मे जाना जाता है। प्रभावित महिला इसे अपनी व्यक्तिगत समस्या मानकर इसे समय से इलाज नही करा पाती है। समय से ईलाज होने पर यह बिमारी पुरी तरह से ठीक हो जाता है। होमियो पैथिक विधि मे इसका सफल ईलाज है। महीला मे होने वाली बिमारी लोग लाक-लाज्या के कारण समय पर नही ईलाज हो पाता है।

  • वैवाहिक संभोग से इंकार

संभोग एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन शरिर के संवेदनशील हो जाने के कारण संभोग मे महीला को कष्टप्रद हो जाता है। इसलिए महीला संभोग से कतराने लगती है या तो इससे बिल्कुल इंकार कर जाती है। ईलाज के उपरांत यह बिमारी पुरी तरह से ठीक हो जाता है।

  • संभोग के बाद के इच्छा मे कमी का नही होना

संम्भोग के बाद लगातार संभोग की इच्छा का बना रहने से मानसिक तनाव मे कमी नही आता है, लेकिन बार-बार संभोग के कारण कमजोरी के साथ-साथ अन्य दुसरे तरह की समस्या का समना करना पर सकता है। इसका इलाज किया जा सकता है।

  • समभोग जैसा एहसास होना

संभोग की क्रिया नही होने के बाबजुद संभोग जैसा एहसास के  होने से मन मे चंचलतापन बना रहता है, जिससे सेक्स का तनाव का मन मे बिचार बनते रहता है। जिसका निदान ईलाज के द्वारा सम्भव है।

    • संभोग के बादः-
    • संभोग के बाद भी संभोग जैसा एहसास का बना रहना शरीर तथा मनसिक संवेदनशीलता को दर्शाता है। मन मे संभोग का चिंतन बना रहता है जिससे शरीरीक उत्तेजना का बना रहना इस तरह का एहसास कराता है।
    • मध्यरात्री के बादः-
    • मध्यरात्री के बाद का सम्भोग जैसा एहसास का होना मानसिक चिंतन की पराकाष्ठा के साथ-साथ शारीरीक तैयारी का भी भाव जगाता है। इससे यदी आपको कोई पड़ेसानी का सामना करना पड़े तो इसका ईलाज करा लेना चाहीए।
    • सोने तथा जागने के बीच मेः-
    • सोने तथा जागने के बीच का समय स्वप्न तथा जागृत और गहरा चिंतन का समय होता है। कोई ऐसा वाकया जो स्मरण मे रहता है, इस समय सक्रिय हो जाता है तथा संभोग जैसा एहसास के बनने का कारण बनता है। अतः कारण का पता लगाकर इसका ईलाज कराना चाहीए।
  • सम्भोग की तरह कामुकता का एहसास

यह एक मानसिक वैचारीक प्रक्रिया है जिसके फलस्वरूप सम्भोग करने कि मानसिक प्रबृती बनी रहती है। इस तरह का मानसिक तनाव बनने के कारण अन्य कार्य मे मन नहीं लगता है। व्यक्ति का स्वभाव भी बदल जाता है। अतः इसका इलाज सम्भव है।

 

पुरुष मे

पुरुष मे संभोग महिला के अपेक्षाकृत आक्रामक रुप मे देखने को मिलता है। यह आक्रमकता उसके पौरुष स्वभाव के कारण होता है। सभोग की प्रप्ती नही होने के कई कारण होते है। मुख्य कारण तथा उसका समुचित समाधान हम यहाँ वर्णन कर रहे है।

  • संभोग मे कमीः- पुरुष मे संभोग मे कमी के कई कारण है। यह शारिरीक तथा मानसिक दोनो तरह से होता है। मानसिक का ईलाज साईकोथेरेपी के द्वारा किया जाता है।  ज्यादा परेशानी होने पर दवा का सहारा भी लेना परता है।
    • देरी से स्खलन होनाः- पुरुष मे उम्र ज्यादा होने के कारण स्खलन देरी से होता है। यह कारण शारिरीक शिथिलता आने के कारण होता है। युवा मे यह कारण कभी-कभी दवा खाने के कारण दिखाई पड़ता है। इसका ईलाज करके इसे ठीक किया जा सकता है।
  • संभोग मे आग्रसर होने से पहले बार-बार स्खलन होनाः- इस क्रिया के कारण पुरुष अवसाद ग्रस्त हो जाता है। बार-बार स्खलन होना शारिरीक कमजोरी तथा शिस्न मे शिथिलता भी कारण बनता है।
  • संभोग से अनिक्षाः- इसका कारण मानसिक ज्यादा होता है। तनाव, मानसिक रुग्रनता, गहरी निराशा, हस्तमैथून, शिस्न मे शिथिलता आदि कारण होता है। जिसका समाधान ईलाज के द्वारा किया जाता है।
    • कामुक स्वप्न के साथ स्खलन से अनिक्षाः- संभोग के प्रती अधिक सेवेदनशीलता के कारण कामुक स्वप्न आता है, जो बिना वास्तविक संभोग के स्खलन हो जाता है, जिससे संभोग मे अनिक्षा होती है।
    • नपंसकता के साथ अनिक्षाः- नपंसकता कई कारणो से होती है, लेकिन अनिक्षा का होना होर्मोनल गड़बरी को बतलाता है। अतःइसका पता लगाकर इसको दुर किया जा सकता है।
    • हस्तमैथुन के द्वारा अनिक्षाः- हस्तमैथुन अधिक होने के कारण संभोग के प्रती अनिक्षा हो जाता है। अतः इसे कम करना चहिए। य़दि जरुरत परे तो ईलाज कराना चाहीए।
    • दर्द के कारणः- दर्द के कारण मन कलुषित हो जाता है तथा संभोग के प्रती अनिक्षा का भाव पैदा हो जाता है। अतः दर्द का पता लगाकर इसको दुर किया जाना चाहिए।
  • सेभोग मे आन्नद की बिसंगतिः- संभोग के आन्नद मे बिसंगति का कई कारण है। यह एक पुर्ण रूप से मनोबैज्ञानिक कारण के फलस्वरूप इसमे उतार-चढ़ाव आता है। शारिरीक बिषमता के कारण यदि कोई दिक्कत आती है तो इसका ईलाज कराना आवश्यक हो जाता है। आन्नद की गति को बनाये रखने के लिए हमेशा खुश रहने की कोशिस करणा चाहिए। खुशी शरिर के प्रत्येक भाग मे अपना प्रभाव दिखाता है तथा शरिर को उध्वालित करता है जिससे आन्नद कई गुणा बढ़़ जाता है।
    • आन्नद का अभावः- संभोग मे आन्नद का अभाव होना गहरी निराशा या नफरत जैसे मानसिक कारण होता है तो शारिरीक बिषमता भा कारण बनता है। इसका पता लागाकर ईलाज किया जाता है।
    • आन्नद मे कमीः- संभोग के आन्नद मे कमी का प्रमुख कारण मानसिक होता है। मन यदि स्वस्थ्य नही हो तो आन्नद मे कमी स्वभाविक है। कभी-कभी दवा के प्रयोग के कारण भी यह समस्या आ जाती है। पसन्द नापसन्द भी कारण बनता है। अतः समुचित कारण का पता लगाकर ईलाज करने से बिमारी पुर्ण रूप से ठिक हो जाता है।
    • जलन के कारणः- संभोग करने के समय जलन होने के कारण भी संभोग के आन्नद मे कमी देखने को मिलता है। इसका कारण स्त्री के योनि मे जलन भी होता है। कभी-कभी शिश्न मे जख्म हो जाने कारण भी यह समस्या आती है।
    • अत्यन्त आन्नदः- संभोग के प्रति अति इच्छा के कारण यह बिसंगति आती है। इसे अपके नजरीये मे भी फर्क हो सकता है जैसे आपका कामुक दिमाग का होना यानी हर वक्त सेक्स के प्रति सोचते रहना।
    • बहुत कम होनाः-
  • रक

 

 

 

 

लेखक- डा अमर नाथ साहु